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तीन साल की बच्ची को थाने क्यों बुलाया?' दुष्कर्म केस में सुप्रीम कोर्ट की गुरुग्राम पुलिस को कड़ी फटकार'Why was a three-year-old girl summoned to the police station?' Supreme Court sternly reprimands Gurugram Police in rape case.

 

गुरुग्राम में तीन साल की मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमिटी की कार्यशैली को लेकर तीखी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पूरे मामले को बेहद संवेदनहीन और शर्मनाक बताते हुए सवाल उठाया कि आखिर इतनी छोटी बच्ची को बार-बार थाने क्यों बुलाया गया।


बच्ची के माता-पिता ने याचिका दायर कर मामले की जांच सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित एसआईटी से कराने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने लापरवाही बरती और बच्ची को बार-बार थाने और अदालत के चक्कर लगवाए, जिससे उसका मानसिक आघात और बढ़ा।

घर जाने के बजाय बच्ची को बार-बार थाने बुलाती रही

यह मामला दिसंबर-जनवरी का है। गुरुग्राम की एक हाईराइज सोसाइटी में रहने वाली तीन साल की बच्ची के साथ कथित तौर पर दो महिला घरेलू सहायिकाओं और उनके एक पुरुष साथी ने बार-बार यौन शोषण किया। मामला पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुआ, लेकिन जांच में गंभीरता की कमी सामने आई। हैरानी की बात यह रही कि पुलिस खुद घर जाने के बजाय बच्ची को बार-बार थाने बुलाती रही।

इतनी छोटी बच्ची को थाने बुलाना अमानवीय है

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इतनी छोटी बच्ची को थाने बुलाना अमानवीय है। कोर्ट ने पूछा कि पुलिस उसके घर जाकर बयान क्यों नहीं ले सकती थी। क्या यह संवेदनशीलता की कमी नहीं दर्शाता?

30 मिनट तक आरोपी के साथ बंद कमरे में रखा गया

कोर्ट ने यह भी पाया कि बच्ची का बयान मजिस्ट्रेट के सामने आरोपी की मौजूदगी में दर्ज किया गया, जो पॉक्सो कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है। इतना ही नहीं, बच्ची को करीब 30 मिनट तक आरोपी के साथ बंद कमरे में रखा गया, जिससे उसका मानसिक तनाव और बढ़ा।

चाइल्ड वेलफेयर कमिटी की भूमिका पर भी सवाल

चाइल्ड वेलफेयर कमिटी की भूमिका पर भी कोर्ट ने सवाल उठाए। बच्ची को एक महीने में कई बार कमिटी के सामने पेश किया गया और कुछ मौकों पर माता-पिता की अनुपस्थिति में उससे पूछताछ हुई। इस पर कोर्ट ने कमिटी के सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया

कोर्ट ने कहा कि बच्ची को पुलिस स्टेशन, अस्पताल, कमिटी कार्यालय और अदालत के बार-बार चक्कर लगाने पड़े, जो किसी भी छोटे बच्चे के लिए अत्यंत पीड़ादायक अनुभव है। मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया है। यह टीम हरियाणा कैडर की वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारियों से मिलकर बनेगी।

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