राजधानी भोपाल की जीवनरेखा कहा जाने वाला बड़ा तालाब दम तोड़ रहा है। गूगल अर्थ की सैटेलाइट इमेजरी के आंकड़े बताते है, पिछले 30 वर्षों में तालाब का एक-चौथाई हिस्सा अतिक्रमण व मानवीय हस्तक्षेप की भेंट चढ़ चुका है। 1995 में जिस तालाब का क्षेत्रफल 39.8 वर्ग किमी था, वह 2025 तक सिमटकर 29.6 वर्ग किमी रह गया है। यानी तीन दशकों में ढाई हजार एकड़ से अधिक तालाब की जमीन हड़प ली गई। इसकी परिधि भी 58.1 किमी से घटकर 44.5 किमी रह गई है। अब तक प्रशासन ने निजी व सरकारी दोनों भूमि पर 334 अवैध निर्माणों को चिह्नित किया है, जो तालाब के लिए खतरा हैं। इनमें बड़े अफसरों, रसूखदारों के विला, होटल शामिल हैं। इनपर बुलडोजर चलाने से प्रशासन के हाथ कांप रहे हैं।
डरावनी आहट: आंकड़ों के अनुसार, 1995 से 2025 के बीच तालाब के क्षेत्रफल में औसतन 0.34 वर्ग किमी प्रति वर्ष की गिरावट आई है। ऐसा ही रहा तो 2050 तक बड़ा तालाब का क्षेत्रफल 21 वर्ग किमी रह जाएगा। छ्व भोजताल को बचाना है बड़ा तालाब का एक-चौथाई हिस्सा अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है।
भोपाल
तालाब के भदभदा और खानूगांव वाले हिस्से में कैचमेंट एरिया में धड़ल्ले से निर्माण जारी है। जलग्रहण क्षेत्र में कंक्रीट भरने से तालाब तक पानी पहुंचने के प्राकृतिक रास्ते बंद हो रहे हैं। बड़ा तालाब केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भोपाल का फेफड़ा है। यदि सर्वे को कैचमेंट एरिया तक विस्तारित नहीं किया गया और बड़े निर्माणों पर बुलडोजर नहीं चला, तो 2050 तक भोपाल अपनी पहचान खो देगा।
कलेक्टर के दावों और हकीकत में अंतर
तालाब को बचाने के लिए हाल ही में शुरू की गई सर्वे प्रक्रिया अब सुस्त पड़ती दिख रही है। सर्वे के पहले कलेक्टर ने आदेश दिए थे, सर्वे के पहले चरण में तालाब के पूरे कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र) को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। लेकिन, धरातल पर अधिकारियों ने चतुराई दिखाते हुए सर्वे को केवल एफटीएल के 50 मीटर के दायरे तक ही सीमित कर दिया है।
अफसरों, रसूखदारों के विला, बड़े होटल और पक्के निर्माण
सर्वे में भी जो बड़े अतिक्रमण जैसे अफसरों, रसूखदारों के विला, बड़े होटल और पक्के निर्माण चिह्नित हुए हैं, उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। न भविष्य में होती दिखाई दे रही है। अधिकारियों के अनुसार, केवल 49 ऐसे अतिक्रमण चिह्नित हुए हैं, जिन्हें नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा नोटिस देगी, क्योंकि यह एफटीएल की निजी भूमि पर हैं। वहीं 69 अतिक्रमणों को जिला प्रशासन नोटिस देगा क्योंकि ये सरकारी भूमि है।
इधर डीटीएफ हेड, तन्मय शर्मा बताते हैं कि तालाब के एफटीएल में किए गए अतिक्रमणों की पहचान कर ली गई है। नोटिस के बाद तोडऩे की कार्रवाई होगी।

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