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पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में कोर इलेक्शन मैनेजमेंट संभालेगा संघThe Sangh will handle core election management in West Bengal, Tamil Nadu, and Kerala.

 


 संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए 

- संगठनात्मक संरचना में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए 

- 11 की जगह 9 क्षेत्र होंगे, 46 प्रांतों को

80 संभागों में विभाजित किया जाएगा 

- वरिष्ठ प्रचारकों के दायित्वों में परिवर्तन सितंबर में होने वाली प्रांत प्रचारकों की बैठक में किया जाएगा


हरियाणा के समलखा में संपन्न राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की राजनीतिक-सामाजिक रणनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। संघ ने आगामी चुनावी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे रणनीतिक राज्यों में कोर इलेक्शन मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभालने का संकेत दिया है। इसके साथ ही संघ की संगठनात्मक संरचना में भी बड़े बदलाव करते हुए क्षेत्रों की संख्या 11 से घटाकर 9 करने और 46 प्रांतों को 80 संभागों में पुनर्गठित करने का निर्णय लिया गया है। वरिष्ठ प्रचारकों के दायित्वों में संभावित फेरबदल पर अंतिम निर्णय अगस्त, सितंबर में होने वाली प्रांत प्रचारकों की बैठक में लिया जाएगा। दरअसल, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मैदानी नेटवर्क भाजपा से अधिक मजबूत है। इसलिए इन तीनों राज्यों में बुनियादी मतदान केंद्र प्रबंधन की जिम्मेदारी संघ के तेज तर्रार कार्यकर्ता संभालेंगे। असम और पुडुचेरी में भाजपा और एनडीए सक्षम है। यहां संघ दूसरे तरीके से काम करेगा। विधानसभा चुनावों में भाजपा की सहायता करने का निर्णय अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया, जो प्रतिनिधि सभा प्रारंभ होने के एक दिन पूर्व यानी 12 मार्च को हुई थी। सूत्रों के अनुसार भाजपा और संघ के शीर्ष पदाधिकारियों की भी अलग से बैठकें इस दौरान हुई हैं।

​संगठनात्मक ढांचे में प्रमुख बदलाव

​बैठक में चर्चा किए गए प्रस्तावों के अनुसार, संघ अपनी इकाइयों को छोटा और अधिक प्रभावी बनाने जा रहा है। वर्तमान में संघ के कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरे देश को 11 क्षेत्रों में बांटा गया था, जिसे अब घटाकर 9 क्षेत्र करने का निर्णय लिया गया है।

​सबसे बड़ा बदलाव दरअसल ,'प्रांत' और 'संभाग' के स्तर पर है। वर्तमान की 46 प्रांतों की व्यवस्था के स्थान पर अब देशभर में लगभग 80 संभाग बनाए जाने की योजना है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य यह है कि जिला और प्रखंड स्तर के कार्यकर्ताओं का सीधा संवाद संभाग स्तर के प्रचारकों से हो सके, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो और सामाजिक कार्यों की पहुंच बढ़े।

इस बदलाव का प्रभा

​इस नई रचना (46 प्रांतों के बजाय 80 संभाग) से मध्य क्षेत्र में प्रचारकों और कार्यवाहों की संख्या में वृद्धि होगी। अब एक संभाग में संभाग प्रचारकों के पास औसतन 400 से 500 शाखाओं की जिम्मेदारी होगी, जो पहले 1,000 से अधिक हुआ करती थी। इससे संघ के 'पंच परिवर्तन' (सामाजिक समरसता आदि) के कार्यक्रमों को गांव-गांव तक ले जाना आसान होगा।

​क्रियान्वयन की समय सीमा

​यद्यपि इन बदलावों के खाके को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है, लेकिन इन्हें तुरंत लागू नहीं किया जा रहा है। चूंकि 2026 संघ का शताब्दी वर्ष है और कई बड़े कार्यक्रम (जैसे गृह संपर्क अभियान) पहले से ही चल रहे हैं, इसलिए वर्तमान जिम्मेदारियों में बड़े फेरबदल अभी नहीं किए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इन बदलावों को अगस्त,सितंबर की प्रांत प्रचारकों बैठक में अंतिम रूप दिया जा सकता है और 2027 तक पूरे देश में नई नियुक्तियों के साथ इसे पूर्णतः लागू किया जाएगा।

​शाखों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि

 बैठक में बताया गया कि पिछले एक साल में करीब 6,000 नई शाखाएं जुड़ी हैं, जिससे देशभर में कुल संख्या 88,000 के पार पहुंच गई है। ध्यान रहे संघ ने अक्टूबर 2026 की विजयदशमी तक शाखाओं की संख्या 1 लाख तक करने का निर्णय लिया है।

​मध्य क्षेत्र की शाखाओं की संख्या भी बढ़ी 

मध्य क्षेत्र के अंतर्गत मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य आते हैं। इनमें संघ के अनुसार प्रांतों की संख्या चार है। मध्य प्रदेश में (मालवा, महाकौशल और मध्य भारत प्रांत की मिलाकर)

शाखाओं की संख्या 7,200 है। जबकि छत्तीसगढ़ में लगभग 2,400। यानी मध्य क्षेत्र शाखाओं की कुल संख्या 9,600 से कुछ अधिक है। ध्यान रहे यह संख्या केवल 'दैनिक शाखाओं' की है। यदि इसमें 'साप्ताहिक मिलन' और 'संघ मंडली' को भी जोड़ दिया जाए, तो यह आंकड़ा 13,000 के पार चला जाता है। समालखा बैठक में यह भी बताया गया कि मध्य प्रदेश के इंदौर और उज्जैन संभागों में शाखा विस्तार की गति देशभर में सबसे अधिक रही है।

मध्य क्षेत्र में संभागों का नया ढांचा

​पुराने ढांचे में मध्य क्षेत्र के अंतर्गत मुख्य रूप से 4 प्रांत (मध्य भारत, मालवा, महाकौशल और छत्तीसगढ़) आते थे। नई रचना के अनुसार अब इन्हें संभागों में विकेंद्रित किया गया है:

​कुल प्रस्तावित संभाग: मध्य क्षेत्र (मप्र-छग) को अब कुल 11 से 12 संभागों में विभाजित किया जा रहा है।

​मध्य प्रदेश: यहां मालवा, मध्य भारत और महाकौशल प्रांतों को पुनर्गठित कर लगभग 8 से 9 संभाग बनाए गए हैं। उदाहरण के लिए, इंदौर, ग्वालियर, भोपाल और जबलपुर जैसे बड़े केंद्रों को अब स्वतंत्र संभाग के रूप में अधिक स्वायत्तता दी गई है ताकि वे निचले स्तर की टोलियों (बस्तियों और गांवों) पर बेहतर ध्यान दे सकें।

​छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ प्रांत को अब 3 संभागों (रायपुर, बिलासपुर और बस्तर/सरगुजा क्षेत्र) में बांटने की योजना है। प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, मध्य क्षेत्र संघ के कार्य के विस्तार की दृष्टि से देश के सबसे अग्रणी क्षेत्रों में से एक है।

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