कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मातृशक्ति को भी साधा। उन्होंने पहाड़ की महिलाओं के संघर्ष, साहस और समाज को नई दिशा देने वाले कार्यों को नमन किया।
साथ ही रानी कर्णावती, गौरा देवी, बछेंद्री पाल, पद्मश्री बसंती देवी और वंदना कटारिया योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय अंचल की बेटियों ने अपने कामों से देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया देवभूमि का नाम रोशन करते हुए महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दिया है।उन्होंने कहा कि पहाड़ की महिलाओं का योगदान प्रत्येक क्षेत्र में अतुलनीय रहा है। इसलिए उत्तराखंड की धरा नारी शक्ति की पावन भूमि भी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नारी सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण काम कर रही है। साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार के लिए महिला सशक्तिकरण सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुका है।
सरकार स्थानीय स्तर पर विभिन्न योजनाएं चलाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसका परिणाम दिखने भी लगा है। सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर अभूतपूर्व काम किया गया है।
वहीं, राज्य सरकार ने इस वर्ष के बजट में साढ़े 19 हजार करोड़ से अधिक का जेंडर बजट प्रस्तुत किया है। जो पिछले साल की तुलना में लगभग 2700 करोड़ रुपये अधिक है। यह सरकार की ओर से महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उठाए जा रहे ठोस कदमों को दर्शाता है।
आधुनिक और सबको समान शिक्षा का कदम सराहनीय
उत्तराखंड में धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड को खत्म कर दिया है। अब उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत मदरसे और अन्य अल्पसंख्यक संस्थान संचालित होंगे। इस वर्ष से हय व्यवस्था लागू हो जाएगी। जिसमें उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता मिलेगी और एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू होगा।
ऐसे में मदरसा बोर्ड खत्म होने से वहां पढ़ने वाले बच्चों आधुनिक और समान शिक्षा मिलेगी। राज्य सरकार के इस कदम को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सराहा।

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