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वेस्ट एशिया संकट पर PM मोदी एक्टिव, ईरान से शांति की अपील, दुनिया के नेताओं से लगातार बातचीतPM Modi Takes Active Role in West Asia Crisis: Appeals for Peace to Iran, Holds Continuous Talks with World Leaders

 

पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते संघर्ष के बीच Narendra Modi ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। Ministry of External Affairs के अनुसार, प्रधानमंत्री इस संकट को लेकर कई देशों के नेताओं से लगातार बातचीत कर रहे हैं, ताकि हालात को बिगड़ने से रोका जा सके।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने जानकारी दी कि ये बातचीत खास तौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि फरवरी के अंत से जिस तरह से हालात बिगड़े हैं, उसे देखते हुए भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।


हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने Iran के राष्ट्रपति से भी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि यह समय क्षेत्र में शांति और स्थिरता लेकर आएगा। साथ ही उन्होंने नागरिक इलाकों और महत्वपूर्ण ढांचों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई और इनकी निंदा की।भारत ने साफ कहा है कि इस तरह के हमले न सिर्फ क्षेत्र के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं, क्योंकि इससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। खास तौर पर तेल और गैस की सप्लाई पर इसका सीधा असर पड़ता है।

इस पूरे संकट में Strait of Hormuz सबसे अहम बन गया है। यह दुनिया का प्रमुख समुद्री रास्ता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। भारत ने जोर देकर कहा है कि इस रास्ते को हर हाल में खुला और सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित न हो। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत के लिए पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस मामले में ईरान ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।


पिछले कुछ हफ्तों में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई हुई है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। ऊर्जा ठिकानों पर हमले और समुद्र में बढ़ती सैन्य गतिविधि ने पूरे क्षेत्र को तनावपूर्ण बना दिया है। भारत इस स्थिति में संतुलन बनाए रखते हुए एक तरफ शांति की अपील कर रहा है और दूसरी तरफ अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में अगर तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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