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MP के 413 नगरीय निकायों में एल्डरमैनों की पहले होगी नियुक्ति, बाद में की जाएगी पुलिस वैरिफिकेशन, 1800 से ज्यादा की लिस्ट फाइनलIn the 413 urban local bodies of MP, Aldermen will be appointed first, followed by police verification; a list of over 1,800 candidates has been finalized

 

मध्य प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में पहले एल्डरमैनों के नॉमिनेशन की प्रक्रिया पूरी हो गई। आज या कल में नियुक्ति आदेश जारी करने की तैयारी है। तय किया गया है कि पहले नियुक्त आदेश जारी होंगे और इसके बाद पुलिस वेरिफिकेशन की जाएगी। इसके लिए कार्योत्तर अनुमोदन बाद में ले लिया जाएगा।


राज्य सरकार ने एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) के 1800 से अधिक नामों की फाइनल सूची पर मुहर लगा दी है। इनमें ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी गई है जो नगरीय निकायों में प्रशासनिक और नगर पालिका व नगर पालिका अधिनियम के जानकार हैं। पार्टी संगठन ने विधायकों से नाम मांगे थे।

सूत्रों के अनुसार भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े नगर निगमों में आठ से दस एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे। जबकि नगर पालिकाओं में छह-छह और नगर परिषदों में चार-चार एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे। इस तरह 16 नगर निगमों, 99 नगर पालिकाओं और 298 नगर परिषदों में 1800 से अधिक एल्डरमैनों की नियुक्ति का फार्मूला तय किया गया है।

बता दें कि मोहन सरकार बनने के बाद से ही भाजपा कार्यकर्ताओं को इसका इंतजार था। इसमें अन्य दलों से आए नेताओं को समायोजित किया जाएगा। वर्ष 2027 में नगरीय निकाय चुनाव होना है ऐसे में एल्डरमैनों को सवा डेढ़ साल का समय मिलेगा।

मतदान का नहीं रहता है अधिकार

प्रदेश के नगरीय निकायों में प्रशासनिक और नगर पालिका व नगर पालिका अधिनियम के जानकारों को एल्डरमैन के रूप में नियुक्त करने का प्रविधान है। एल्डरमैन परिषद की बैठकों और चर्चाओं में भाग ले सकते हैं, लेकिन उनके पास परिषद में मत का अधिकार नहीं होता है। आमतौर पर क्षेत्र के सक्रिय पार्टी कार्यकर्ताओं को एल्डरमैन नियुक्त करने के लिए संगठन की ओर से नाम प्रस्तावित किए जाते हैं। परिषद के कार्यकाल तक इनका भी कार्यकाल रहता है।

निगम-मंडलों में भी नियुक्ति का इंतजार

मध्य प्रदेश के भाजपा नेताओं को निगम-मंडलों में नियुक्ति का भी इंतजार है। इनमें पूर्व मंत्री व कांग्रेस से आकर चुनाव जीतने वाले नेताओं की नियुक्त की जा सकती है। कई वरिष्ठ नेताओं को 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद कैबिनेट में नहीं लिया गया था, ऐसे नेताओं को भरोसा था कि अब उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई बार टलते-टलते अब निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सही समय आ गया है। ऐसे में निगम मंडलों में अध्यक्ष उपाध्यक्ष की नामों की सूची भी जल्द आ सकती है। बता दें कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस संबंध में दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के साथ चर्चा भी की है ताकि क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधा जा सके।

जनभागीदारी समितियों में भी की जाएगी नियुक्तियां

मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में जनभागीदारी समितियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया की जा रही है। इन समितियों में भी कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों को शामिल करने के लिए विधायकों की पसंद के अनुसार नामों पर विचार किया जा रहा है।

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