गुड गवर्नेंस के लिए राज्य सरकार द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं. अब राज्य सरकार अपने अधिकारियों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने जा रही है. इसके लिए राज्य आनंद संस्थान तीन दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम कराने जा रही है, इसमें अधिकारियां को पर्सनल और प्रोफेशनल एथिक्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए विभिन्न विभागों और जिलों के अधिकारियों को बुलाया जा रहा है. अधिकारियों को यह प्रशिक्षण देश के पूर्व कैबिनेट सचिव प्रभात कुमात और दूसरे रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स द्वारा दिया जाएगा. इसमें अधिकारियों को पब्लिक डीलिंग के बारे में भी बताया जाएगा.
भोपाल में तीन दिन चलेगी अधिकारियों की क्लास
राज्य आनंद संस्थान के सीईओ आशीष कुमार बताते हैं, '' संस्थान द्वारा लगातार अलग-अलग विभागों के कर्मचारी अधिकारियों और खासतौर पर सीनियर अधिकारियों का प्रशिक्षण किया जा रहा है. इसका विषय एथिक्स इन पब्लिक सर्विस रखा गया है. यानी सरकारी सिस्टम में रहते हुए पर्सनल और प्रोफेशनल एथिक्स को किस तरह रखा जाए, कार्य की गुणवत्ता बढ़े और सरकार की योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ हो. यह ट्रेनिंग कार्यक्रम राजधानी भोपाल की प्रशासन अकादमी में 24 से 26 मार्च तक आयोजित किया जाएगा. इसके लिए विभिन्न विभागों और जिलों के अधिकारियों को ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया है.
रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स बताएंगे कार्यक्षेत्र में नैतिकता क्यों जरूरी
राज्य आनंद संस्थान दिल्ली की आईसी फॉर गवर्नेंस के साथ मिलकर इस ट्रेनिंग को कराने जा रहा है. इस संस्था के विशेषज्ञ देशभर में ह्यूमन वेल्यूज पर काम करते हैं. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में देश के पूर्व कैबिनेट सचिव प्रभात कुमार, अर्चना दुबे, डॉ. अमित मुखर्जी, वीरेश कुमार भावरा, शांति भूषण और दिलीप पटेल जैसे रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस, आईआरएस और विशेषज्ञों के लैक्चर होंगे. कार्यक्रम के दौरान प्रजेंटेशन के अलावा डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएंगी. इसके अलावा कई तरह की एक्टिविटीज भी होंगी.
इसके जरिए अधिकारियों को सकारात्मकता के साथ बेहतर ढंग से कामकाज करने के टिप्स दिए जाएंगे. सर्विस में रहते हुए नैतिकता बनाए रखकर काम करने से सिस्टम में आने वाले सकारात्मक बदलावों के बारे में भी उन्हें बताया जाएगा.
मुख्यमंत्री लगातार दे चुके सहज बर्ताव की नसीहत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अधिकारियों को लगातार सहज, विनम्र और संवेदनशील होने के बारे में कहते आए हैं. पिछले दिनों भी एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा था, '' कर्मचारी अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र में सहज, सरल और संवेदनशील व्यवहार रखें. प्रशासन जनता का हितैषी बनकर काम करे.'' रिटायर्ड अधिकारी अरूण गुर्टू कहते हैं, '' लोक सेवक के व्यवहार में यदि जनता के प्रति उत्तरदायित्व और नैतिकता में कमी होती है, तो इसका सीधा असर सरकार की योजनाओं पर दिखाई देता है.

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