मध्य प्रदेश में शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया संकट में फंसी हुई है। सरकार ने राजस्व का जो भारी-भरकम लक्ष्य रखा था, वह अब तक पूरा नहीं हुआ। बड़े शहरों में ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं। वहीं दुकानों के ठेके खत्म होने में अब बहुत कम समय बचा है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शराब दुकानों की नीलामी में पूरे राज्य में राजस्व बहुत कम हो रहा है। इस वक्त जो शराब के ठेके हैं, वो सिर्फ 20 दिन में खत्म हो जाएंगे। वहीं, इस साल सरकार ने 19 हजार 952 करोड़ का टराजस्व लक्ष्य रखा है, लेकिन अब तक सिर्फ आठ हजार 483 करोड़ ही जुटाए जा सके हैं।
इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे जिले लक्ष्य से बहुत पीछे हैं। वहीं भोपाल में तो तय लक्ष्य का सिर्फ 4% ही राजस्व मिला है। इसके अलावा कुल 916 समूहों में से 492 समूहों की ई-टेंडरिंग अभी बाकी है।
नहीं मिल रहे ठेकेदार
सरकार ने इस बार शराब के ठेकों में बड़े समूहों की मोनोपोली तोड़ने के लिए, नवीनीकरण और लॉटरी खत्म कर सीधे ई-टेंडरिंग का सिस्टम शुरु किया था। इसका उद्देश्य था कि सालों से जमे हुए पुराने समूहों को हटाकर नए लोगों को भी मौका मिले।
हर साल की तरह इस बार भी शराब की दुकानों की कीमतें 20% बढ़ा दी गई हैं। बढ़ी हुई कीमतों पर ठेकेदार ढूंढ़ने में मुश्किल हो रही है। अब तक ई-टेंडरिंग के जरिए 424 समूहों की नीलामी से केवल आठ हजार 483 करोड़ रुपए की दुकानों की नीलामी हो पाई है।
दुकानों को 5 समूहों में बांटेगा विभाग
भोपाल में 87 दुकानों के 20 समूह बनाए गए हैं। अब तक एक समूह को 57 करोड़ रूपए में नीलाम किया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नीलामी की प्रक्रिया में ठेके 1193 करोड़ रूपए से ज्यादा में हुए थे। ये टारगेट से 11% यानी 120 करोड़ रुपए अधिक थे। इस बार 20% मूल्य बढ़ाकर रिजर्व प्राइस 1432 करोड़ रूपए रखी गई है।
2 मार्च को हुई प्रक्रिया में किसी ने टेंडर नहीं भटा लेकिन 5 मार्च को नीलामी हुई थी। अब विभाग बची हुई दुकानों को 5 समूहों में बांटेगा और 250 से 270 करोड़ के समूह बनाकर नीलामी करेगा। हालांकि बड़े समूह बनने से परेशानी औट बढ़ने की संभावना है।
भोपाल पिछड़े जिलों में शामिल
इंदौर में लगभग 72%, जबलपुर में 15%, ग्वालियर में 49% और उज्जैन में सिर्फ 42% राजस्व ही अब तक मिला है। सिर्फ डिंडोरी, खरगोन, शहडोल, सीधी और उमरिया में ही अब तक 100% शराब दुकानों की नीलामी हो सकी है। भोपाल के अलावा नीमच, अनूपपुर, देवास और कटनी राजस्व के मामले में सबसे पिछड़े जिलों में शामिल हैं।
सोम ग्रुप इस बार नीलामी से बाहर
बीते साल भोपाल और अन्य जिलों में शराब के ठेके 12 से 35% ज्यादा कीमत पर लेने वाला, सोम ग्रुप इस बार नीलामी से बाहर हो गया है। रायसेन में शराब के अवैध परिवहन के मामले में इसका लाइसेंस पहले ही सस्पेंड कर दिया गया था। पिछले साल इस समूह ने भोपाल में ग्रुप । का ठेका 303 करोड़ की जगह 307 कटोड़ में लिया था।
आबकारी विभाग की जानकारी के मुताबिक अभी ई-टेंडरिंग के अलावा ई-टेंडरिंग कम ऑक्शन चलता रहेगा। बाद में हो सकता है कि रिजर्व प्राइस में कुछ बदलाव किया जाए। ठेकेदारों को एक कड़ा संदेश देने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों की दुकानों को एक ही समूह में भी जोड़ सकते हैं।
वर्जन
आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि 2026-27 का राजस्व लक्ष्य पूरा करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। आबकारी अधिकारियों से रोजाना फीडबैक लिया जा रहा है। इस लक्ष्य को पाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।


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