ईरान की ओर से किए गए ताबड़तोड़ मिसाइल हमलों ने इजराइल के दक्षिणी हिस्से में बड़ा असर डाला है। शनिवार को डिमोना में एक इमारत ढह गई, जिसमें करीब 47 लोग घायल हो गए। राहत और बचाव दल कई इलाकों में मलबे के बीच लोगों की तलाश में जुटे हैं।
मलबा गिरने से ढही इमारत
इजराइल की फायर एंड रेस्क्यू सर्विस के मुताबिक, यह इमारत सीधे मिसाइल से नहीं बल्कि इंटरसेप्ट किए गए बैलिस्टिक मिसाइल के मलबे के गिरने से ढही। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में क्लस्टर म्यूनिशन और अलग बैलिस्टिक मिसाइल के हमले की भी बात कही गई है, जिससे स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
डिमोना पर यह हमला ईरान के लगातार चल रहे मिसाइल अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। आधी रात के बाद यह पांचवां हमला था, जिसमें सायरन बजते ही लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। शुरुआती सैन्य आकलन के मुताबिक, अधिकतर मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया था।
उत्तर में भी हमले, लेबनान से रॉकेट दागे गए
दक्षिण में हमलों के साथ ही उत्तरी इजराइल में भी तनाव बढ़ गया। हिज़बुल्लाह की ओर से लेबनान से रॉकेट दागे गए, जिससे Western Galilee और Nahariya क्षेत्र में भी सायरन गूंज उठे।
क्यों अहम है डिमोना?
डिमोना रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील शहर माना जाता है। यहां Shimon Peres Negev Nuclear Research Center स्थित है, जिसे इजराइल के परमाणु कार्यक्रम का अहम केंद्र माना जाता है। इजराइल ने हमेशा अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ‘न्यूक्लियर एम्बिग्युटी’ की नीति अपनाई है—यानी न तो इसकी पुष्टि करता है और न ही इनकार। इस केंद्र को देश की सबसे मजबूत सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाता है।
बढ़ता खतरा, जारी राहत अभियान
हमलों के बाद राहत और बचाव कार्य जारी है और स्थिति को लेकर लगातार अपडेट सामने आ रहे हैं। हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं, और इस हमले ने एक बार फिर मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है।

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