सम्पादकीय
बजट दस्तावेज़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के लिए आवंटन बढ़कर लगभग 1.39 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान की तुलना में 14.21 प्रतिशत की वृद्धि है। हालांकि, इस बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के खाते में गया है। विशेष रूप से अटल टिंकरिंग लैब्स के लिए आवंटन में बड़ा उछाल देखने को मिला है पिछले वर्ष के 500 करोड़ रुपये से बढ़कर इस वर्ष 3,200 करोड़ रुपये, यानी करीब 2,700 करोड़ रुपये की वृद्धि।
इसके विपरीत, मुख्यधारा की उच्च शिक्षा से जुड़ी बुनियादी समस्याओं जैसे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की स्थिति को लेकर कोई ठोस या बड़ा बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है, जबकि सरकार कॉलेजों में सकल नामांकन अनुपात (GER) को 50 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य तय कर चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई के हिसाब से समायोजन करने और लंबे समय से किए गए फंडिंग वादों के संदर्भ में यह वृद्धि अभी भी सीमित है। इसी बीच, आर्थिक सर्वेक्षण उच्च शिक्षा में क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन (रचनात्मक विध्वंस) की भविष्यवाणी करता है।
सर्वेक्षण में कहा गया है।कंटेंट डिलीवरी के बदलते तरीकों के साथ, पारंपरिक उच्च शिक्षण संस्थान (HEIs) अब एडटेक प्लेटफॉर्म्स से भी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। जैसे-जैसे कंटेंट और उसकी डिलीवरी की गुणवत्ता प्रदर्शन का मुख्य पैमाना बनती जा रही है, वैसे-वैसे यही पैमाना प्रदर्शन-आधारित फंडिंग का आधार भी बन रहा है। इससे पारंपरिक, संस्थान-केंद्रित फंडिंग की जगह शिक्षार्थी-केंद्रित समर्थन की ओर झुकाव हो रहा है, जहां शिक्षार्थियों को सीधे फंड दिया जाएगा और उन्हें कंटेंट प्रदाताओं को चुनने की आज़ादी होगी। इन बदलावों से संस्थानों की स्वामित्व संरचना, भौगोलिक स्थिति, पुरानी प्रतिष्ठा और अन्य पारंपरिक कारक धुंधले पड़ते जा रहे हैं।”महिंद्रा यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. याजुलु मेदुरी ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 भारत को एक वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने की दिशा में एक साहसिक कदम है।
‘युवा शक्ति’ पहल पर फोकस के जरिए सरकार कक्षा में होने वाली पढ़ाई और वास्तविक दुनिया के करियर के बीच की खाई को पाटने का प्रयास कर रही है, खासकर ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था तेजी से ज्ञान-आधारित होती जा रही है। उच्च-स्तरीय ‘एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट एंटरप्राइजेज’ स्थायी समिति के गठन से 2047 तक भारत सेवाक्षेत्र में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ विश्व नेतृत्व की भूमिका में आ सकता है। पांच नई यूनिवर्सिटी टाउनशिप और मॉड्यूलर ‘कॉरपोरेट मित्र’ पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव वैश्विक बाजार के लिए युवाओं को तैयार करने के तरीके में बड़ा बदलाव लाएगा।
बजट में प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के साथ पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव किया गया है, जिनमें विश्वविद्यालय, शोध केंद्र, आवासीय सुविधाएं और उद्योग साझेदारियां एकीकृत होंगी। इसके अलावा, पूर्वी भारत में डिजाइन शिक्षा और नवाचार को मजबूत करने के उद्देश्य से एक नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID) की स्थापना का भी प्रस्ताव है।वर्ल्ड यूनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन के कुलपति डॉ. संजय गुप्ता का कहना है कि बजट में रचनात्मक और डिजाइन अर्थव्यवस्था को लेकर दिया गया मजबूत प्रोत्साहन भारत के युवाओं के लिए एक स्वागतयोग्य कदम है। मैं लंबे समय से इसकी वकालत करता रहा हूं। स्कूलों और कॉलेजों में एवीजीसी और कंटेंट क्रिएशन लैब्स के विस्तार से सरकार उभरती रचनात्मक अर्थव्यवस्था में भविष्य-उन्मुख करियर के नए अवसर खोल रही है।
डिजाइन शिक्षा को मजबूत करने का प्रस्ताव लंबे समय से चली आ रही प्रतिभा की कमी को दूर करने की दिशा में अहम है। ये सभी कदम मिलकर रचनात्मकता को बढ़ावा देंगे, सार्थक रोजगार के अवसर पैदा करेंगे और भारत को डिजाइन, कंटेंट और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद करेंगे। छात्राओं की पहुंच और शिक्षा में बने रहने (रिटेंशन) को बेहतर बनाने के लिए वित्त मंत्री ने देश के हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल स्थापित करने की घोषणा की है। सरकार ने विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों पर वित्तीय दबाव कम करने के संकेत भी दिए हैं, जिनमें विदेशी प्रेषण पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) में संशोधन शामिल है।

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