भोपाल: नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की जेब पर असर डालने वाले कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से घर और जमीन खरीदना महंगा होगा, बिजली बिल बढ़ेगा, हाईवे पर सफर के लिए ज्यादा टोल देना पड़ेगा और एटीएम से पैसे निकालना भी महंगा हो जाएगा. इसके साथ ही रेलवे रिजर्वेशन के नियम बदलेंगे. कचरा प्रबंधन के नए नियम लागू होंगे और आयकर व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है. इन फैसलों का सीधा असर आम आदमी के मासिक बजट और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा.
घर और जमीन खरीदना होगा महंगा
नए वित्तीय वर्ष के साथ मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा. सरकार ने कलेक्टर गाइडलाइन की दरों में औसतन करीब 16 प्रतिशत तक बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. इससे रजिस्ट्री कराने की लागत बढ़ जाएगी. प्रदेश में लगभग 65 हजार स्थानों पर नई गाइडलाइन लागू की जा रही है. इसके अलावा पक्के मकानों के निर्माण की लागत भी करीब 1000 रुपए प्रति वर्गमीटर बढ़ा दी गई है. ऐसे में घर या जमीन खरीदने वाले लोगों को अब पहले की तुलना में ज्यादा रकम चुकानी पड़ेगी.
प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ जारी किया है. इसके तहत बिजली की दरों में औसतन करीब 4.80 प्रतिशत की वृद्धि की गई है. नई दरों का असर प्रदेश के करीब 1.5 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. हालांकि 100 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को कुछ राहत दी गई है. लेकिन अधिक खपत करने वालों के बिल में स्पष्ट बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. उदाहरण के तौर पर 200 यूनिट बिजली खपत पर पिछले साल की तुलना में करीब 80 रुपए ज्यादा और 400 यूनिट खपत पर 150 रुपए से अधिक की बढ़ोतरी हो सकती है.
हाईवे पर सफर करना भी महंगा
1 अप्रैल से राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर भी महंगा हो जाएगा. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने टोल टैक्स में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी लागू करने का फैसला किया है. इसका असर प्रदेश से गुजरने वाले प्रमुख हाईवे पर पड़ेगा. इससे जबलपुर से नागपुर, रायपुर, प्रयागराज और भोपाल की यात्रा करने वाले वाहन चालकों को हर टोल प्लाजा पर ज्यादा भुगतान करना होगा. वहीं कार चालकों को कई टोल प्लाजा पर 5 से 10 रुपए तक अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है. इसके अलावा फास्टैग से मिलने वाले वार्षिक पास की कीमत में भी लगभग 75 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है.
एटीएम से पैसे निकालना होगा महंगा
नए वित्तीय वर्ष में बैंक ग्राहकों के लिए एटीएम का उपयोग भी महंगा हो जाएगा. पांच मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा खत्म होने के बाद अब अतिरिक्त निकासी पर ग्राहकों को पहले से ज्यादा शुल्क देना पड़ेगा. नई व्यवस्था के तहत हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर करीब 23 रुपए तक शुल्क और उस पर लागू टैक्स देना होगा. इससे बार-बार एटीएम से पैसे निकालने वाले ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
रेलवे रिजर्वेशन नियम बदले
रेलवे यात्रियों के लिए भी 1 अप्रैल से रिजर्वेशन और टिकट कैंसिलेशन के नियमों में बदलाव लागू होने जा रहे हैं. नए नियमों के अनुसार ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 8 घंटे के भीतर टिकट रद्द करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा. पहले यह समय सीमा 4 घंटे थी. वहीं 8 से 24 घंटे पहले टिकट रद्द करने पर किराए का लगभग 50 प्रतिशत और 24 से 72 घंटे पहले रद्द करने पर 25 प्रतिशत कटौती के बाद शेष राशि लौटाई जाएगी. इसके अलावा यात्री ट्रेन के प्रस्थान से आधा घंटा पहले तक क्लास अपग्रेड कराने की सुविधा भी ले सकेंगे.
कचरा अलग नहीं किया तो जुर्माना
शहरों में साफ-सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 1 अप्रैल से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 लागू किए जा रहे हैं. इसके तहत हर घर को कचरे को 4 अलग-अलग हिस्सों में बांटना अनिवार्य होगा. इनमें गीला, सूखा, सैनिटरी और खतरनाक कचरा शामिल है. यदि कोई घर, होटल या संस्था कचरे का पृथक्करण नहीं करती है तो नगर निगम सीधे जुर्माना लगा सकेगा. बड़ी सोसायटी, होटल और अस्पताल जैसे बल्क वेस्ट जनरेटर को अपने स्तर पर कचरे का निपटान भी करना होगा.
आयकर प्रणाली में भी बदलाव
आयकर कानून को सरल बनाने के लिए भी नए बदलाव लागू किए जा रहे हैं. अब फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर जैसे शब्दों की जगह ‘टैक्स ईयर’ शब्द का उपयोग किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल और समझने में आसान बनाना है. डिजिटल माध्यमों से टैक्स भुगतान और रिटर्न फाइलिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो सके.
नगर निगम कर में छूट खत्म होने का असर
वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन 31 मार्च तक संपत्तिकर और जल उपभोक्ता प्रभार जमा करने पर अधिभार में 100 प्रतिशत तक छूट दी गई है. लेकिन 1 अप्रैल के बाद यह राहत खत्म हो जाएगी. नगर निगम के अनुसार स्वयं उपयोग वाली संपत्तियों पर अब दोगुना भुगतान करना पड़ सकता है और पहले मिलने वाली 50 प्रतिशत की छूट भी समाप्त हो जाएगी. ऐसे में समय पर कर जमा नहीं करने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है.

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