पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी भयंकर जंग के बीच भारत की चिंताएं भी बढ़ने लगी थीं. खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस की सप्लाई होर्मूज स्ट्रेट के माध्यम से ही होती है जो फिलहाल बंद है. ऐसी मुश्किल घड़ी में भारत की चिंता दूर करने के लिए दोस्त रूस एक बार फिर सामने आया है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस पश्चिम एशिया में खराब होते हालात के बीच भारत को क्रूड ऑयल की सप्लाई करने के लिए तैयार है. भारतीय तटों से नजदीक ही मौजूद जहाजों पर पहले से ही लगभग 9.5 मिलियन बैरल रूसी क्रूड ऑयल है जो कुछ हफ़्तों में ही यहां आ सकता है.
रूसी अधिकारियों ने रॉयटर्स को ये भी बताया है कि अगर खाड़ी से शिपमेंट में दिक्कतें बढ़ती हैं तो रूस भारत को एनर्जी सप्लाई में मदद करने के लिए तैयार है. रूस से मदद का ये आश्वासन ऐसे समय आया है जब ईरान पर US-इज़राइली हमलों से शुरू हुई लड़ाई छठवें दिन में पहुंच गई है.
भारतीय रिफाइनर ट्रेडर्स के साथ संपर्क में हैं
ईरान-अमेरिका जंग के कारण देश को मुश्किल का सामना न करना पड़े इसलिए भारतीय रिफाइनर रूसी क्रूड ऑयल बेचने वाले ट्रेडर्स के साथ रेगुलर कॉन्टैक्ट में हैं. अभी भारतीय समंदर के नजदीक जहाजों पर लगभग 9.5 मिलियन बैरल रूसी क्रूड ऑयल है जिसे रिफाइनरियों तक पहुंचाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा. हालांकि इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि रूसी तेल खरीद में कोई भी बढ़ोतरी भारत सरकार के निर्देशों पर ही निर्भर करेगी.
कच्चे तेल के दाम बढ़े
बता दें कि ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है. सप्लाई पर असर पड़ने के कारण कीमतों में उछाल आया है. होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे जहाजों पर ईरान ने हमले किए हैं जिससे मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है.
भारत के कितना तेल भंडार है?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी को लेकर फिलहाल चिंता करने की जरूरत नहीं है. देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है. हालांकि युद्ध लंबे समय तक चला तो तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत के आयात बिल पर असर डाल सकती है. यदि कच्चे तेल की कीमत पूरे साल के लिए प्रति बैरल 1 डॉलर बढ़ती है तो भारत का आयात बिल लगभग 16,000 करोड़ रुपए तक बढ़ सकता है.

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