विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) की छठवीं बटालियन में साढ़े तीन करोड़ रुपये के घोटाले और आरक्षक अभिषेक झारिया की अचानक मौत का मामला उलझता जा रहा है। जाली बिल से छठवीं बटालियन में किए गए भत्ता घोटाले और संबंधित आरक्षक की मौत की जांच रांझी पुलिस कर रही है। मौत के चार माह बाद भी पुलिस आरक्षक का मोबाइल फोन रिकवर नहीं कर सकी है। भत्ता घोटाले की जांच भी धीमी पड़ गई हैइस घोटाला का मास्टरमाइंड छठवीं बटालियन के एएसआई सत्यम शर्मा के होने की आशंका है। गबन और आरक्षक की मौत में संदिग्ध भूमिका होने के बावजूद सत्यम को अब तक गिरफ्तार नहीं किए जाने से जांच कर रहे अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध हो गई है। मृतक आरक्षक अभिषेक झारिया के स्वजन ने कई ऐसे संदेह व्यक्त किए हैं, जिससे घोटाले और घटना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
घोटाला सामने आते ही ट्रेन से कटकर मौत
भोपाल के आयुक्त कोष एवं लेखा कार्यालय को जांच में छठी बटालियन के यात्रा भत्ता भुगतान में अनियमितता मिली थी। जाली यात्रा भत्ता बिल लगाकर बटालियन के जवानों के खातों में मोटी राशि ट्रांसफर कर गबन की गई थी। छानबीन में फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड एएसआइ सत्यम शर्मा निकला था। वह जाली बिलों से जवानों के खातों में फर्जी यात्रा भत्ता की राशि भेजता था।
जवानों को कमीशन देकर बाकी राशि वह उनसे नकद लेकर अपने पास रख लेता था। प्रारंभिक जांच में पाया गया था कि सत्यम ने आरक्षक अभिषेक झारिया के माध्यम से एक जनवरी, 2022 से 12 नवंबर, 2025 तक बटालियन के अधिकारियों से धोखे से ओटीपी प्राप्त सरकारी राशि का गबन किया।
घोटाला उजागर होने और निलंबन की कार्रवाई का शिकंजा कसने के बाद 12 नवंबर, 2025 को आरक्षक अभिषेक रहस्यमयी ढंग से गायब हो गया था। बाद में उसका शव शोभापुर में रेल पटरी पर मिला था। उसकी मौत के बाद ही आरोपित सत्यम शर्मा भी गायब है।

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