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इंदौर का कैंसर अस्पताल हो रहा सरकारी सुस्ती का शिकार, 2 साल में पूरे करने का दावा, लेकिन ढाई साल बाद भी 2 मंजिल तैयार नहींIndore's Cancer Hospital Falls Victim to Bureaucratic Sluggishness: Claimed to be Completed in Two Years, Yet Two and a Half Years Later, Not Even Two Floors Are Ready.

 इंदौर। कैंसर मरीजों को आधुनिक इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया नए कैंसर अस्पताल का निर्माण कार्य अब खुद सरकारी सुस्ती का शिकार होता नजर आ रहा है। अक्टूबर 2023 में दावा करते हुए प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा कर पांच मंजिला अस्पताल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी स्थिति यह है कि भवन की दो मंजिल तक पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी है।अस्पताल निर्माण में देरी का असर उन हजारों मरीजों पर पड़ रहा है, जो बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर यहां आते हैं। मध्य प्रदेश ही नहीं, आसपास के अन्य राज्यों से भी मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं, लेकिन अधूरी सुविधाओं के कारण उन्हें निराशा हाथ लग रही है।


पीआईयू द्वारा गुजरात की एक कंपनी को अस्पताल के निर्माण का जिम्मा दिया गया है, लेकिन वह ठीक से काम नहीं कर रही है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार अधिकारी भी अस्पताल के निर्माण कार्य को लेकर गंभीर नहीं हैं। यह कैबिन से बाहर निकलकर निरीक्षण करने भी नहीं जाते हैं। निर्माण कार्य में हो रही देरी के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

पुरानी बिल्डिंग और खराब मशीनों से इलाज

फिलहाल कैंसर अस्पताल पुरानी बिल्डिंग में ही संचालित हो रहा है, जहां सुविधाएं सीमित हैं। यहां लगी मशीनें भी बार-बार खराब हो जाती हैं, जिससे मरीजों का इलाज प्रभावित होता है। चिंताजनक है कि अभी भी मरीजों का उपचार कोबाल्ट मशीन से किया जा रहा है, जबकि कई अस्पतालों में उन्नत तकनीकों का उपयोग हो रहा है।

सबसे अधिक हेड एंड नेक कैंसर के मरीज

विशेषज्ञों के मुताबिक पुरुषों में सबसे अधिक हेड एंड नेक कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं, जिसका मुख्य कारण धूमपान है। वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

45 करोड़ में हो रहा निर्माण

अस्पताल का निर्माण करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। 321 बेड की क्षमता वाले इस अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं, जिनमें लीनियर एक्सलरेटर के लिए बंकर, एचडीआर ब्रेकीथेरेपी मशीन और रेडियोथेरेपी के लिए समर्पित सीटी मशीन शामिल हैं। ये सभी सुविधाएं कैंसर मरीजों के लिए आवश्यक हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी बनी हुई है।

नए कैंसर अस्पताल का निर्माण कार्य जल्दी हो इसके लिए नोटिस भेजा है। इस संबंध में भोपाल में बैठक भी आयोजित हुई थी। जून तक अस्पताल का निर्माण और लीनियर एक्सलरेटर के लिए बंकर तैयार हो जाएगा। अस्पताल निर्माण को लेकर मानिटरिंग की जा रही है। - डा. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज।

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