जगदाले स्कूल में 32 साल बाद यादों का मेला"
यादों का उत्सव – जगदाले स्कूल का री यूनियन
इंदौर। वक्त के पहिए पीछे घूम गए और चेहरे की झुर्रियों के पीछे छिपा वो मासूम बचपन एक बार फिर खिलखिला उठा। मौका था जगदाले स्कूल के 1992-93 बैच के री-यूनियन का, जहाँ रविवार को सालों बाद सभी सहपाठी एक ही छत के नीचे जमा हुए। कबीर दास जी की पंक्तियाँ “जहाँ दया तहँ धर्म है, जहाँ लोभ तहँ पाप” यहाँ चरितार्थ होती दिखीं, क्योंकि यहाँ न कोई पद का बड़ा था, न कोई छोटा—बस थी तो अटूट दोस्ती और दिल से दिल की बातें।
गुरुओं का सम्मान और भावुक मिलन
कार्यक्रम की शुरुआत बेहद भावुक रही। जैसे ही पुराने शिक्षक स्कूल के गेट पर पहुँचे, उनके शिष्यों ने पलक-पावड़े बिछा दिए। शिक्षकों का भव्य स्वागत कर उन्हें ससम्मान प्रांगण में लाया गया, जहाँ छात्रों ने उनका आशीर्वाद लिया और सम्मान किया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्री संजय जगदाले सर ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, "यह री-यूनियन केवल एक बैच तक सीमित न रहे, बल्कि हमें आने वाली हर क्लास को इससे जोड़ना है, जिसकी जिम्मेदारी आज की इस टीम को उठानी होगी।" उन्होंने इस प्रयास को नई ऊर्जा देने की बात कही।
"मेरे प्यारे बच्चों..." और नम आँखें
जब मंच से सुषमा अवधूत मैडम ने संबोधन शुरू करते हुए कहा— "मेरे प्यारे बच्चों", तो वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो गया। भले ही आज वे छात्र 50 साल की उम्र के पड़ाव पर हों, लेकिन उन शब्दों ने उन्हें फिर से अपनी बेंच पर बैठे नन्हे छात्र बना दिया। स्कूल की दीवारें भी जैसे फुसफुसा रही थीं— “मेरे आँगन में फिर से बचपन उतर आया है।” ### पापा की PTM में आए बच्चे इस मिलन की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब दिखी जब पूर्व छात्रों के बच्चे भी अपने माता-पिता का स्कूल देखने पहुँचे। बच्चों ने चुटकी लेते हुए कहा, "आज हम पापा की PTM (पेरेंट्स टीचर मीटिंग) में आए हैं।" पुराने अनुभवों को साझा करते हुए जगजीत सिंह की गजल— “ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो... मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन” हर किसी की जुबां पर थी।
सात शहरों से आए पुराने साथी
दोस्ती की इस पुकार पर छात्र न केवल इंदौर, बल्कि नागपुर, बेंगलुरु, भोपाल, अहमदाबाद, खंडवा और उज्जैन जैसे शहरों से भी खिंचे चले आए। कार्यक्रम का सफल संचालन सुबोध कर्णिक एवं पूजा पंड्या ने किया।
सहयोग और उपस्थिति: कार्यक्रम को सफल बनाने में आशीष तिवारी, राहुल अग्रवाल, संदीप झंवर, मनीष गुप्ता, सुबोध कर्णिक, साकेत मिश्रा, पूजा पंड्या, सुनीता आर्य, मनीष पवार, नरेश त्रिवेदी, प्रदीप परतानी, महेश सैनी, रुपेश तम्बोली, मनोज काकानी, संदीप जैन, मूर्तजा अली, देवेंद्र गर्ग, विनोद मैना, सारिका राइजादा,नीतू त्रिवेदी, चंद्रशेखर पराते, मनीष बी गुप्ता, रश्मि जैन, सुमन मुंदडा, राधा अग्रवाल, इंद्रजीत सिंह, दीपक बज, भगवान् पाटीदार सहित कई छात्रों का विशेष योगदान रहा।

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