विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि भारत में सामने आए निपाह वायरस के मामले दूसरे देशों तक फैलने की संभावना बहुत कम है। WHO के मुताबिक, अभी ऐसी कोई जरूरत नहीं है कि देशों को भारत के लिए यात्रा प्रतिबंध लगाने पड़ें। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब निपाह वायरस को लेकर लोगों में डर और चिंता बढ़ी हुई है।
WHO ने रॉयटर्स को ईमेल में बताया कि अब तक सामने आए मामलों के आधार पर संक्रमण के और ज्यादा फैलने का जोखिम कम है। संगठन ने यह भी कहा कि भारत के पास इस तरह के संक्रमण को कंट्रोल करने की पूरी क्षमता है। WHO के अनुसार, अभी तक मानव से मानव में तेजी से फैलने के कोई सबूत नहीं मिले हैं और भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
अब तक कितने मामले सामने आए?
इस महीने की शुरुआत में कोलकाता स्थित AIIMS अस्पताल की दो नर्सें निपाह वायरस से संक्रमित पाई गई थीं, जिसके बाद उन्हें क्वारंटीन कर दिया गया। इसके बाद बड़े पैमाने पर जांच शुरू की गई। 30 जनवरी तक कुल 5 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें एक डॉक्टर और एक अस्पताल स्टाफ भी शामिल हैं। इसके अलावा करीब 100 लोगों को निगरानी और क्वारंटीन में रखा गया है।
हालांकि भारतीय स्वास्थ्य अधिकारी मानते हैं कि इस वायरस का देशों की सीमाएं पार करना लगभग नामुमकिन है, फिर भी एहतियात के तौर पर ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देश अलर्ट पर हैं और एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग शुरू कर चुके हैं।
निपाह वायरस क्या है?
WHO के मुताबिक, निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। इसका मुख्य स्रोत फ्रूट बैट (चमगादड़) होते हैं। यह वायरस उन फलों के जरिए फैल सकता है, जिन पर संक्रमित चमगादड़ों की लार, पेशाब या मल लग जाता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीब रहने या उसके शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से भी यह फैल सकता है। निपाह वायरस बेहद खतरनाक माना जाता है, क्योंकि इसकी मृत्यु दर करीब 75 प्रतिशत है और अभी तक इसका कोई टीका उपलब्ध नहीं है।
निपाह के लक्षण क्या हैं?
इस बीमारी के आम लक्षणों में शामिल हैं:
बुखार
सिरदर्द
सांस लेने में तकलीफ
खांसी और गले में खराश
दस्त और उल्टी
मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी
डॉक्टर क्या सलाह दे रहे हैं?
डॉक्टर लोगों को खासतौर पर खान-पान में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजीव जयवेदन के अनुसार, यह संक्रमण आमतौर पर तब फैलता है, जब इंसान गलती से संक्रमित चमगादड़ के संपर्क में आ जाता है। यह खतरा खासकर ग्रामीण और जंगल से सटे इलाकों में ज्यादा होता है। संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. ऐश्वर्या आर. का कहना है कि लोग पेड़ों से गिरे फल न खाएं, बिना धोए फल न खाएं, कच्चा खजूर का रस (डेट पाम सैप) पीने से बचें। थोड़ी सी सावधानी इस गंभीर बीमारी से बचाव में बहुत मददगार साबित हो सकती

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