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क्या अब नहीं होगा दोनों NCP का विलय, सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना क्या बता रहा?Will the two NCP factions not merge now? What does Sunetra Pawar becoming Deputy Chief Minister indicate?

 

सम्पादकीय


अजित पवार की आकस्मिक मौत और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार का तीन दिनों के अंदर उपमुख्यमंत्री बनना दोनों एनसीपी के विलय की संभावना पर ब्रेक लगा रहा है, क्योंकि जिस तरह से आनन-फानन में सुनेत्रा पवार को पार्टी विधायक दल का नेता चुना गया और फिर उन्हें उपमुख्यमंत्री के पद की शपथ दिलाई गई और शरद पवार के जैसे बयान आए, उन सभी से साफ है कि फिलहाल दोनों गुटों के बीच विलय की संभावना पर विराम लगने का संकेत दे रहा है.खुद शरद पवार ने भी इस बात को स्वीकार किया है. शनिवार को शरद पवार ने माना कि दोनों गुटों को फिर से एक करने के लिए महीनों से बातचीत चल रही थी, जिसमें अजित पवार और जयंत पाटिल इस प्रोसेस को लीड कर रहे थे.




उन्होंने कहा कि सारी बातचीत उनके लेवल पर हुई थी, लेकिन अब ऐसा लगता है कि प्लेन एक्सीडेंट के बाद इस प्रोसेस में रुकावट आ सकती है. बातचीत पॉजिटिव दिशा में आगे बढ़ रही थी, लेकिन एक्सीडेंट ने प्रोसेस पर बुरा असर डाला, हालांकि उन्होंने इच्छा जताई कि अजित पवार जैसा चाहते थे. दोनों गुटों के बीच विलय हो और उनकी इच्छा पूरी हो सके.

अजित पवार की मौत के बाद विलय पर सवाल

शरद पवार ने आगे कहा कि दोनों पार्टियों, एक हिस्सा सत्तारुढ़ महायुति का और दूसरा हिस्सा विपक्ष महा विकास अघाड़ी (MVA) का, के विलय की घोषणा 12 फरवरी को होनी थी. पूर्व एनसीपी (एसपी) महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख शशिकांत शिंदे ने भी इसका समर्थन किया. उन्होंने कहा कि 28 जनवरी को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री की असामयिक और दुखद मौत से पहले कई मीटिंग हुई थीं.

शिंदे ने माना कि दोनों एनसीपी के एक साथ आने पर बातचीत और मीटिंग हुई थीं, लेकिन अजित दादा अब नहीं रहे. कुछ बड़े पॉइंट्स पर पहले चर्चा हुई थी. अब, हम चर्चा करेंगे कि क्या करने की जरूरत है और फिर कोई फैसला लेंगे. दूसरे लोग कैसे रिस्पॉन्स देते हैं, यह उनका फैसला है.

उन्होंने आगे दावा किया कि पिछले तीन महीनों में आठ से 10 मीटिंग हुई हैं और अजित पवार और उनके चाचा शरद के बीच 17 जनवरी की मीटिंग के एक वायरल वीडियो पर भी बात की. शिंदे ने कहा कि नगर निगम चुनावों के बाद दोनों पार्टियों को एक करने की दिशा में काम करने का फैसला लिया गया था.

इतनी जल्दी क्यों? सुनेत्रा के उपमुख्यमंत्री बनने पर सवाल

शरद पवार और शिंदे के बयान सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण से पहले आए थे. जिसमें दोनों नेताओं ने जल्दबाजी के पीछे के मकसद पर सवाल उठाए थे. शिंदे ने कहा कि अजित पवार का जाना महाराष्ट्र के लिए बहुत बड़ा नुकसान है. जब राज्य शोक में है, तो यह फैसला क्यों लिया गया, यह हमें नहीं पता. उन्हें यह बताना होगा. इसके साथ ही शरद पवार ने भी दावा किया कि उन्हें यह भी नहीं पता था कि उनके भतीजे की पत्नी को उपमुख्यमंत्री बनाया जाना है.

शरद पवार ने शनिवार को सुनेत्रा पवार के महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने से कुछ घंटे पहले कहा था कि उन्हें शपथ ग्रहण के बारे में पता नहीं है. उन्हें तो यह भी नहीं पता था कि यह आज तय है. शपथ ग्रहण के बारे में उनसे कोई बात नहीं हुई. हो सकता है कि उनकी पार्टी एनसीपी ने यह फैसला लिया हो.

पवार ने कहा कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नाम सामने आए, और पता चला है कि उन्होंने पहल की. ​​हो सकता है कि उन्होंने पार्टी के अंदर ही कोई फैसला लिया हो. उन्होंने इशारा किया कि इस कदम के पीछे एनसीपी के दो नेता थे.

सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने के सियासी मायने

वहीं, सूत्रों का कहना है कि अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा परिवार और अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार फिलहाल एनसीपी के दोनों गुटों के विलय के फैसले को लेकर फिलहाल कोई फैसला नहीं लेना चाहते हैं. वे इस मामले में देखो और इंतजार करो की नीति का पालन कर रहे हैं.

सूत्रों का कहना है कि वर्तमान समय में यदि दोनों गुटों का विलय हो जाता है, तो इससे अजित पवार की पार्टी एनसीपी के अस्तित्व पर खतरा पड़ जाएगा. सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान और उपमुख्यमंत्री के पद की शपथ लेने के बाद उनका राज्यसभा का पद रिक्त हो जाएगा. ऐसा माना जा रहा है कि पार्थ पवार को राज्यसभा सुनेत्रा पवार की जगह भेजा जा सकता है.

ऐसे में यदि दोनों गुटों में विलय हो जाता है तो समीकरण पूरी तरह से बदल जाएंगे और इससे सुनेत्रा पवार को राजनीतिक रूप से नुकसान हो सकता है और यही वजह से है कि सुनेत्रा पवार ने अजित पवार के निधन के बहुत कम समय बाद न केवल पार्टी कमान की बागडोर अपने हाथों में ली, बल्कि उपमुख्यमंत्री के पद भी जिम्मेदारी लेकर पार्टी और शरद पवार को बड़ा संदेश देने की कोशिश की है. सुनेत्रा पवार ने इसके साथ ही यह संदेश देने की कोशिश की है कि यदि दोनों गुटों में कभी विलय की बात होती है, तो वो पूर्व परिस्थिति और पूर्व शर्तों के अनुकूल ही होगी.

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