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पश्चिम बंगाल में ममता की दुधारू गाय अब लात मारने को तैयार In West Bengal, Mamata's cash cow is now ready to kick.

    • रवि उपाध्याय 


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों निर्वाचन आयोग और उसके आयुक्त ज्ञानेश कुमार से खासी नाराज़ हैं। वजह है पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग द्वारा करवाया जा रहा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण। इसी सिलसिले में ममता बनर्जी आज दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मुलाकात की।उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर में सही लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने इसको लेकर वहां के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की शिकायत की। उनके साथ ममता जी के भतीजा अभिषेक बनर्जी भी थे। 


बाद में ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयुक्त से मुलाकात के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि निर्वाचन आयुक्त एक अहंकारी और झूठा है। ऐसा आदमी पहले कभी नहीं देखा। ममता बनर्जी ने कहा कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने राज्य में 2 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए। उन्होंने दावा किया कि वे अपने साथ पश्चिम बंगाल से करीब 100 ऐसे लोगों को लाई हैं जो मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से प्रभावित हुए हैं। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी चुनाव आयुक्त से बहुत ही खफ़ा नजर आईं। उन्होंने चुनाव आयुक्त को चेताया कि उनका भी हाल पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की तरह होगा। ममता जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के दौरान जिन बीएलओ की मौतें हुई है उसकी जवाबदेही मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेनी चाहिए।

बता दें कि बिहार में विधानसभा चुनावों के पहले हुए मतदाता सूचियों के सफल गहन पुनरीक्षण के बाद निर्वाचन आयोग ने 12 अक्टूबर 25 को पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण कराने के आदेश दिए थे।इसमें केवल दो राज्यों तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में ही इसका कड़ा विरोध किया। इन राज्यों के नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा एसआईआर के माध्यम से सही वोटर्स के नाम काट कर सत्ता हड़पना चाहती है। जबकि शेष राज्यों में शांतिपूर्ण एसआईआर किया गया।

         ममता इस बार मुसीबत 

जिस तरह की पिछले कुछ महीनों से पश्चिम बंगाल के हालात चल रहे हैं और जिस ढंग से ममता बनर्जी को हुमायूं कबीर और ओवैसी के गठबंधन से मुस्लिम समाज के वोटों के खोने का डर है उससे ममता बनर्जी बहुत परेशान हैं। इसके अलावा इस बार भाजपा की तरफ से उनको 2021 के विधानसभा चुनावों की तुलना में बड़ी चुनौती मिल रही है। राजनीतिक समीक्षकों का आंकलन है कि इस बार पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर हो सकतीं हैं। 

इसके अलावा राज्य में एसआईआर के कारण करीब दो करोड़ लोगों के नाम काटे गए हैं। इनमें राज्य से अन्यत्र चले गए और मृत हो चुके वोटर्स शामिल हैं। पिछले 5 सालों के दौरान जिस तरह से ममता जी के मंत्री भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे हैं, जिस तरह कानून व्यवस्था की स्थिति है और उन पर एक खास वर्ग के तुष्टिकरण के आरोप लगे हैं उससे ममता की छबि को नुक्सान हुआ है।  

ममता बनर्जी की दुधारू गाय अब विधानसभा चुनावों को उन्हीं को लात मारने को तैयार है। यह वही वर्ग है जिसने उनकी सरकार में सबसे अधिक रशोगुल्ला खाया है। वही वर्ग अब उनकी पार्टी टीएमसी के लिए मुसीबत बन गया है। ममता सरकार में मंत्री रहा हुमायूं कबीर ने अपनी अलग पार्टी बना ली है और वह अब उनके लिए मुसीबत बन गया है। कई विधानसभा क्षेत्रों में इस वर्ग के वोटर्स का प्रतिशत 20 से 35 तक जा पहुंचा है। बता दें कि पश्चिम बंगाल में SIR के पहले चरण के बाद 7.66 करोड़ वोटर बताए गए हैं। राज्य विधानसभा में 294 सदस्य हैं। 

महादेव की शरण से ममता 

ममता बनर्जी ने अपनी सरकार में मुस्लिम समाज का जमकर तुष्टिकरण किया । मोहर्रम के जुलूस के लिए देवी माता के जुलूस पर रोक लगाई। हिंदुओं को तरह तरह से प्रताड़ित किया और अब जब अपनी कुर्सी डगमगाई तो हिंदू होने का स्वांग भरने लगी। पश्चिम बंगाल के दीघा में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ भगवान के मंदिर की तर्ज पर मंदिर बनवाया और अब वे महाँकाल का मंदिर बनवा रहीं हैं।

         घुसपैठियों की समस्या 

यह सर्वविदित हैं कि पश्चिम बंगाल एक सरहदी राज्य है। इसकी सीमाएं बांग्ला देश से लगी हुई है। इसी तरह असम, मेघालय,त्रिपुरा आदि भी सरहदी राज्य हैं। जिनकी सीमाएं बांग्लादेश से लगी हुई हैं। इन राज्यों में घुसपैठियों के होने के आरोप हैं। जिन्होंने यहां अवैध वोटर कार्ड आधार कार्ड बनवा लिए हैं। यह इन राज्यों में अवैध रूप से वोट डालते रहे हैं।

SIR के दौरान मीडिया ने हजारों कि संख्या में घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश भागते हुए दिखाया गया है । साथ ही राज्य में जहां इनकी अवैध बस्तियां थी वे वीरान हो गई हैं। इनमें रहने वाले परिवारों की हजारों में थीं।

ऐसा माना जाता है कि यह सत्तारूढ़ पार्टी के लिए वोट करते रहे हैं। क्योंकि इनको वोटर बनवाने में टीएमसी के नेता और कार्यकर्ताओं की बड़ी भूमिका रही है। जब पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य की सरकारें थी तब खुद ममता बनर्जी ने लोकसभा में राज्य में बड़ी संख्या में हजारों की संख्या में अवैध घुसपैठियों के होने के लिए बड़ा हंगामा किया था। परंतु उनके सत्ता आने के बाद वह चुप्पी मार गईं और कथित अवैध घुसपैठिए उन्हें वोट देने लग गए।

   काले कपड़ों में ममता

कल ममता बनर्जी करीब 100 लोगों के साथ दिल्ली पहुंची तो सभी काले कपड़ों में थे और खुद ममता जी ने भी काला शॉल ओढ़ा हुआ था। यह तो सभी जानते हैं कि ममता बड़ी लड़ाका हैं और वे विद्रोही स्वभाव की रहीं हैं। ड्रामा करना वो अच्छे से जानती हैं। पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव के समय प्रचार के दौरान उनके पैर में फ्रैक्चर होने का दावा किया था। वे चुनाव चलने तक पैर में पट्टे के साथ व्हील चेयर पर बैठे तब से नजर आईं जब तक चुनाव रिजल्ट नहीं आ गए और जैसे ही चुनाव परिणाम आ गए वे व्हील चेयर छोड़ दौड़ने लगीं।

   सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर और आई पैक पर सुनवाई है। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के कई बड़े नेता दिल्ली में मौजूद हैं। ममता आज दिल्ली स्थित बंगाल भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली हैं। उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR के खिलाफ हैं। वह इसे रुकवाना चाह रही हैं। पश्चिम बंगाल समेत जिन 12 राज्यों में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का काम चल रहा है उनमें से किसी भी राज्य ने इस प्रक्रिया का विरोध नहीं किया है। सबसे ज्यादा परेशान ममता बनर्जी ही हैं।

 ( लेखक राजनैतिक समीक्षक एवं एक व्यंग्यकार भी हैं। )


03022026

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