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कार्यकारी प्रस्ताव से भर्ती नियम नहीं बदल सकते: दिल्ली हाइकोर्ट जामिया को सहायक पुस्तकालयाध्यक्षों की पदोन्नति पर विचार करने का निर्देशExecutive orders cannot change recruitment rules: Delhi High Court directs Jamia to consider promotion of assistant librarians.

 

दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी यूनिवर्सिटी का कार्यकारी प्रस्ताव (एग्जीक्यूटिव रेज़ोल्यूशन) मौजूदा भर्ती नियमों को तब तक नहीं बदल सकता, जब तक उन्हें औपचारिक रूप से संशोधित न किया जाए। हाइकोर्ट ने इसी आधार पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया द्वारा दायर अपील खारिज की। यह फैसला जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद और जस्टिस विमल कुमार यादव की खंडपीठ ने सुनाया। अपील जामिया की ओर से उस एकल पीठ के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें यूनिवर्सिटी को उप पुस्तकालयाध्यक्ष (डिप्टी लाइब्रेरियन) पद पर पदोन्नति के लिए पात्र सहायक पुस्तकालयाध्यक्षों पर विचार करने का निर्देश दिया गया।


जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने दलील दी कि उसकी कार्यकारी परिषद के एक प्रस्ताव के अनुसार उप पुस्तकालयाध्यक्ष का पद 100 प्रतिशत सीधी भर्ती से भरा जाना है, इसलिए पदोन्नति का कोई प्रावधान नहीं है। हाइकोर्ट ने यूनिवर्सिटी की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग की वर्ष 2010 की भर्ती नियमावली ही नियुक्ति और पदोन्नति को नियंत्रित करती है, जब तक कि उन्हें विधिवत रूप से बदला न जाए। हाइकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “यह निर्विवाद है कि मौजूदा भर्ती नियमों के अनुसार सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष पद पर नियुक्ति 50 प्रतिशत सीधी भर्ती और 50 प्रतिशत पदोन्नति के माध्यम से होती है। वर्ष 2010 की नियमावली के किसी भी प्रावधान में यह नहीं कहा गया कि यह पद केवल सीधी भर्ती से ही भरा जाएगा।” हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल कार्यकारी परिषद का प्रस्ताव बनाकर भर्ती नियमों को दरकिनार नहीं किया जा सकता। ऐसे में जामिया मिल्लिया इस्लामिया बाध्य है कि वह उप पुस्तकालयाध्यक्ष पद के लिए पात्र सहायक पुस्तकालयाध्यक्षों की पदोन्नति पर विचार करे। अदालत ने अंततः जामिया की अपील खारिज की और एकल पीठ का आदेश बरकरार रखा।

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