पैंक्रियाटिक (अग्नाशय) कैंसर को सबसे खतरनाक कैंसरों में गिना जाता है। इसकी वजह यह है कि इसका इलाज मुश्किल होता है और दवाएं कुछ समय बाद असर करना बंद कर देती हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों को इस बीमारी के इलाज को लेकर एक बड़ी सफलता मिली है। हाल ही में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने चूहों में पैंक्रियाटिक कैंसर के ट्यूमर को पूरी तरह खत्म करने में कामयाबी हासिल की है।
PNAS में प्रकाशित हुई रिसर्च
यह अहम अध्ययन दुनिया की जानी-मानी वैज्ञानिक पत्रिका PNAS (Proceedings of the National Academy of Sciences) में प्रकाशित हुआ है। रिसर्च में बताया गया है कि वैज्ञानिकों ने तीन दवाओं की संयुक्त थेरेपी (ट्रिपल थेरेपी) का इस्तेमाल किया, जिससे ट्यूमर खत्म हो गए। खास बात यह रही कि इस इलाज में वह समस्या नहीं आई, जो आमतौर पर पैंक्रियाटिक कैंसर में देखने को मिलती है, यानी दवाओं के प्रति कैंसर का रेजिस्टेंट हो जाना।
क्यों फेल हो जाता है मौजूदा इलाज
अभी पैंक्रियाटिक कैंसर के लिए जो दवाएं दी जाती हैं, वे कुछ महीनों तक तो असर दिखाती हैं, लेकिन बाद में ट्यूमर उन दवाओं के मुताबिक खुद को बदल लेता है। इस वजह से इलाज बेअसर हो जाता है। यही कारण है कि इस कैंसर में मरीजों की जीवन-अवधि अक्सर कम रह जाती है।
तीन दवाओं का असरदार कॉम्बिनेशन
यह रिसर्च स्पेन के नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर (CNIO) में की गई, जिसका नेतृत्व मशहूर वैज्ञानिक डॉ. मारियानो बार्बासिड ने किया। उनकी टीम ने एक ऐसी दवा का इस्तेमाल किया, जो पहले से ही फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए मंजूर है। इसके साथ उन्होंने एक खास प्रोटीन डिग्रेडर जोड़ा और फिर तीसरी दवा के साथ इसे मिलाकर इस्तेमाल किया। इस ट्रिपल थेरेपी से तीन अलग-अलग जानवरों पर किए गए प्रयोगों में ट्यूमर पूरी तरह गायब हो गए और कोई बड़े साइड इफेक्ट भी सामने नहीं आए।
वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया
अध्ययन के लेखकों का कहना है कि यह रिसर्च भविष्य में नए इलाज की दिशा तय कर सकती है। उनके मुताबिक, इस तरह की कॉम्बिनेशन थेरेपी से पैंक्रियाटिक डक्टल एडेनोकार्सिनोमा जो इस कैंसर का सबसे आम प्रकार है के मरीजों की जिंदगी लंबी की जा सकती है। यह शोध आने वाले समय में नए क्लिनिकल ट्रायल्स का रास्ता भी खोल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना
इस सफलता पर ब्रिटेन में स्पेन दूतावास ने भी वैज्ञानिकों की तारीफ की है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा गया कि डॉ. मारियानो बार्बासिड के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने प्रयोगों में पैंक्रियाटिक कैंसर को पूरी तरह और स्थायी रूप से खत्म कर दिखाया है, जो इस बीमारी से लड़ाई में बड़ा बदलाव ला सकता है।
क्लिनिकल ट्रायल को लेकर सावधानी
हालांकि वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि अभी इंसानों पर इस ट्रिपल थेरेपी का परीक्षण शुरू नहीं हुआ है। डॉ. बार्बासिड ने कहा कि नतीजे बेहद उत्साहजनक हैं, लेकिन फिलहाल हम मानव क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की स्थिति में नहीं हैं।
भविष्य के लिए नई राह
कुल मिलाकर, यह खोज पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में एक नई उम्मीद लेकर आई है। भले ही यह इलाज अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन आने वाले समय में यह मरीजों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है।

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