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एआई शिखर समिट, भविष्य पर केंद्रित एक व्यापक सम्मेलन ?AI Summit, a comprehensive conference focused on the future?

 सम्पादकीय

एआई इंपैक्ट शिखर सम्मेलन की महत्ता केवल इसलिए नहीं है कि यह एक पांच दिवसीय वैश्विक आयोजन है। इसका महत्व इसलिए भी है, क्योंकि इसमें 15 से अधिक देशों के शासनाध्यक्षों के साथ 50 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। विश्व भर के एआई विशेषज्ञ एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की हिस्सेदारी इस सम्मेलन के आकर्षण को और बढ़ा रही है।


इस आयोजन के प्रति दिलचस्पी को इससे समझा जा सकता है कि दो लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। एक तरह से यह सम्मेलन जी 20 शिखर सम्मेलन से भी अधिक प्रभावशाली एवं विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचने वाला हो सकता है। चूंकि यह भविष्य पर केंद्रित एक व्यापक सम्मेलन है, इसलिए यह आशा की जाती है कि इसके जरिये एआई को एक जिम्मेदार, टिकाऊ और समावेशी तकनीक के रूप में विकसित एवं विस्तारित करने पर सहमति बनेगी।

ऐसा होना भी चाहिए, क्योंकि विश्व भर में एआई का प्रभाव और उसका बाजार तेजी से बढ़ रहा है। जीवन के हर क्षेत्र में एआई का प्रभाव बढ़ता हुआ दिख रहा है। यह सर्वथा उचित है कि इस सम्मेलन में एआई की चुनौतियों से निपटने पर भी विचार-विमर्श होगा, लेकिन बात तब बनेगी जब उससे निपटने के किसी प्रभावी तंत्र पर सहमति भी बनेगी।

यह सहमति इसलिए आवश्यक है, क्योंकि फिलहाल एआई पर चंद बड़े राष्ट्रों का ही वर्चस्व कायम है। यदि इस तकनीक का प्रसार अविकसित एवं निर्धन देशों तक नहीं पहुंचता तो इससे दुनिया में विषमता और अधिक बढ़ेगी ही। एआई का उपयोग समावेशी, नैतिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से हो, इसके लिए मेजबान भारत के साथ-साथ सभी देशों को प्रयत्न करने होंगे।

तकनीक के संदर्भ में इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि प्रत्येक तकनीकी विकास अपने साथ कुछ विसंगतियां एवं खतरे भी लाता है। एआई के साथ तो ऐसा कुछ अधिक ही है। इसके दुरुपयोग के मामले बढ़ते चले जा रहे हैं। नि:संदेह एआई विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो रही है, लेकिन उसका दुरुपयोग जिस तरह बढ़ रहा है, उससे उपयोगकर्ताओं के बीच उसके प्रति विश्वसनीयता और भरोसे का संकट पैदा हो रहा है।

यह आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है कि एआई का दुरुपयोग रोकने की जिम्मेदारी संबंधित कंपनियों पर डाली जाए और इसके लिए उन्हें जवाबदेह भी बनाया जाए। एआई अपने साथ जो चुनौतियां लेकर आई है, उनमें एक यह भी है कि उसके कारण कई परंपरागत नौकरियां खत्म हो रही हैं।

नि:संदेह यह तकनीक परंपरागत नौकरियों को खत्म करने के साथ नई नौकरियां का सृजन भी कर रही है। एक तरह से एआई चुनौतियों के साथ अवसर भी है। भारत को इस अवसर को भुनाने के लिए अपने लोगों को एआई के उपयोग के प्रति सक्षम बनाने के लिए और अधिक सक्रियता दिखानी होगी।

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