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आष्टा सिविल अस्पताल में आयुष्मान योजना का बड़ा घोटाला, 47 लाख से ज्यादा का गबन उजागरA major scam under the Ayushman Yojana scheme has been uncovered at Ashta Civil Hospital, involving the embezzlement of over 47 lakh rupees.

 

सिविल अस्पताल आष्टा में आयुष्मान योजना के तहत वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। बीएमओ डॉ. अमित माथुर ने तत्परता दिखाते हुए इस पूरे मामले का खुलासा किया और मुख्य आरोपितों की साजिश को पकड़ लिया।मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. माथुर ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर दिया है और आगे की कड़ी कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेज दिया है।


जांच में सामने आया है कि इस भ्रष्टाचार में स्टोर इंचार्ज प्रमोद परमार के साथ पूर्व आयुष्मान मित्र जगदीश मेवाड़ा भी समान रूप से शामिल है।

इन दोनों ने मिलकर शातिर तरीके से डॉक्टरों और नर्सों के हक के पैसे को अपने-अपने परिजनों और करीबी रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। वर्ष 2017-18 से लेकर 2023 तक चले इस खेल में लगभग 47 लाख रुपए से अधिक का गबन किया गया है।

इस घोटाले के उजागर होने के बाद तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस प्रक्रिया में भुगतान के लिए मेकर की भूमिका लेखापाल की होती है और चेकर की भूमिका बीएमओ की। तात्कालीन लेखापाल एमएल वर्मा की संलिप्तता के साथ-साथ तत्कालीन बीएमओ डॉ. जीडी सोनी, डॉ. सुरेश माहौर और डॉ. प्रवीर गुप्ता भी संदेह के घेरे में हैं।

तकनीकी रूप से इनके आईडी, पासवर्ड और ओटीपी के बिना किसी भी प्रकार का भुगतान संभव नहीं है, ऐसे में इन अधिकारियों की संलिप्तता या लापरवाही की जांच भी अनिवार्य हो गई है।

हैरानी की बात यह है कि आरोपितों ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों को नहीं बख्शा। आधा दर्जन से ज्यादा सीनियर डाक्टरों और कई स्टाफ नर्सों के इनसेंटिव की राशि रिश्तेदारों के खातों में पहुंचा दी गई। पीड़ितों में डा. एके जैन, डा. माधवी राय, डा. शुभम दलोदरिया और स्वयं पूर्व बीएमओ भी शामिल हैं।

उच्च स्तरीय जांच की तैयारी

बीएमओ डॉ. अमित माथुर ने स्पष्ट किया है कि 440 पन्नों की ट्रांजेक्शन लिस्ट के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है। डॉ. माथुर ने कहा कि चूंकि यह सरकारी राशि के गबन और धोखाधड़ी का मामला है।

इसलिए जल्द ही जांच टीम गठित कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर सहित कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। केंद्र सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना में हुए इस संगठित भ्रष्टाचार ने पूरे जिले के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

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