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थम नहीं रहा कहर! कफ सिरप कांड में फिर एक मौत, 4 महीने तक कोमा में रहने के बाद मासूम ने तोड़ा दमThe tragedy continues! Another death in the cough syrup scandal; the innocent child passed away after being in a coma for four months.

 

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से शुरू हुए 'कोल्ड्रिफ कफ सिरप' (Coldrif Cough Syrup) कांड ने एक और मासूम की जान ले ली है। बैतूल जिले के 4 वर्षीय बालक हर्ष यादव की रविवार (1 फरवरी) रात नागपुर एम्स में मौत हो गई। हर्ष पिछले चार महीनों से कोमा में था और वेंटिलेटर के सहारे अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहा था।


120 दिनों का दर्दनाक संघर्ष

बैतूल की आमला तहसील के ग्राम टीकाबर्री निवासी गोकुल यादव का बेटा हर्ष छिंदवाड़ा के परासिया में हुए उस कफ सिरप कांड का शिकार हुआ था जिसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया था। दवा के कथित रिएक्शन के बाद हर्ष की हालत इतनी बिगड़ गई कि वह कोमा में चला गया। उसे बेहतर इलाज के लिए नागपुर स्थित एम्स (AIIMS) के आईसीयू में भर्ती कराया गया था लेकिन डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जब मासूम का शव गांव पहुंचा तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।

क्या था कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड?

पिछले साल छिंदवाड़ा के परासिया इलाके में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आए थे। इस सिरप के सेवन के बाद बच्चों में किडनी फेलियर और मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर समस्याएं देखी गई थीं। इस मामले में ड्रग विभाग की निगरानी और दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे थे। बैतूल के सीएमएचओ (CMHO) डॉ. मनोज हुरमाड़े ने बताया कि बच्चे की मौत के बाद अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है ताकि मौत के सटीक कारणों को कानूनी तौर पर पुख्ता किया जा सके।

न्याय की मांग और प्रशासन की भूमिका

हर्ष की मौत के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि जहरीली या मिलावटी दवाओं की बिक्री करने वालों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जो एक मिसाल बने। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे और दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग उठाई है।

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