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छत्तीसगढ़-तेलंगाना बिजली विवाद; 3,600 करोड़ के बकाया पर सुलह की उम्मीद, रायपुर आएंगे तेलंगाना के ऊर्जा मंत्रीChhattisgarh-Telangana power dispute: Settlement expected over Rs 3,600 crore in dues; Telangana's Energy Minister to visit Raipur.

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के बीच पिछले छह वर्षों से चला आ रहा 3,600 करोड़ के बकाया बिजली बिल का विवाद अब सुलह की दिशा में आगे बढ़ सकता है। तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार ने इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की पहल की है। कहा जा रहा है कि इस महीने के अंत या मार्च में तेलंगाना के ऊर्जा मंत्री एक उच्च स्तरीय टीम के साथ रायपुर पहुंचेंगे।


बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2000 में मात्र 1,400 मेगावाट क्षमता वाला यह राज्य आज 30,000 मेगावाट उत्पादन कर रहा है, जबकि घरेलू मांग सिर्फ 6,800 मेगावाट है। वर्तमान में राज्य दिल्ली, यूपी और कर्नाटक समेत कई राज्यों को बिजली बेच रहा है। साथ ही पीएम सूर्य घर योजना के तहत 60 हजार घरों को सोलर पैनल से लैस कर अक्षय ऊर्जा की ओर कदम भी बढ़ा दिए हैं।

नियामक आयोग में टली सुनवाई

राज्य विद्युत नियामक आयोग में इस मामले पर 23 जनवरी को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी थी। हालांकि, राज्य पावर कंपनी के आग्रह पर आयोग ने सुनवाई की तिथि आगे बढ़ा दी है। अब इस प्रकरण पर अप्रैल में विचार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, पावर कंपनी ने यह कदम तेलंगाना सरकार की ओर से आए वार्ता के प्रस्ताव के बाद उठाया है, ताकि कानूनी प्रक्रिया से पहले आपसी सहमति की संभावना तलाशी जा सके।

विवाद की जड़ : 3,600 करोड़ बनाम 2,100 करोड़

यह विवाद तत्कालीन डा. रमन सिंह सरकार के समय हुए एक समझौते से शुरू हुआ था, जिसके तहत कोरबा के मड़वा प्लांट से तेलंगाना को 1,000 मेगावाट तक बिजली आपूर्ति की जानी थी। राज्य पावर कंपनी के अनुसार, बकाया राशि बढ़कर 3,600 करोड़ हो गई है। वहीं पूर्व में तेलंगाना बिजली बोर्ड ने केवल 2,100 करोड़ का बकाया स्वीकार किया था और इसे किस्तों में देने की बात कही थी, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। भुगतान नहीं होने के कारण कंपनी ने बिजली आपूर्ति पहले ही बंद कर दी है।

भ्रष्टाचार के आरोपों से उलझा समाधान

तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार द्वारा बिजली खरीदी में 1,300 करोड़ के नुकसान और भ्रष्टाचार के आरोपों ने छत्तीसगढ़ के साथ विवाद को उलझा दिया। मामले की न्यायिक जांच जारी है। समझौते की राह नहीं निकली, तो छत्तीसगढ़ पावर कंपनी बकाया वसूली के लिए नियामक आयोग में जल्द सुनवाई की अपील करेगी।

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