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2050 तक पारा 2 डिग्री बढ़ने का खतरा, ग्लोबल वार्मिंग की चपेट में होगी दुनिया की आधी आबादीBy 2050, there is a risk of temperatures rising by 2 degrees, and half of the world's population will be affected by global warming.

 

धरती का बढ़ता तापमान, ग्लोबल वार्मिंग और इन सब के चलते जलवायु परिवर्तन समूची दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है. हाल ही में सामने आई ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी रिपोर्ट और ज्यादा चौंकाने व सतर्क करने वाली है.


रिपोर्ट बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग के खतरों के प्रति आगाह करती है और कहती है कि अगर 2050 तक इसका स्तर 2 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया तो विश्व को भयावह नतीजे भुगतने पड़ेंगे. तकरीबन 3.79 अरब आबादी को भयंकर गर्मी झेलनी पड़ेगी. यानी दुनिया की लगभग आधी जनसंख्या एक्सट्रीम हीट के हालात में गुजर-बसर करने को मजबूर होगी.

यही नहीं भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, फिलीपींस, नाइजीरिया जैसे देशों में स्थिति और ज्यादा खराब होगी. दरअसल, ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पेरिस एग्रीमेंट में तापमान का मानक 1.5 डिग्री सेल्सियस तय किया गया है. दुनिया की कोशिश ग्लोबल वार्मिंग के स्तर को इससे नीचे रखने की है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां बताती हैं कि धरती का बढ़ता तापमान इस लिमिट को पार जाएगा.

अगर धरती का तापमान 1.5 डिग्री से ज्यादा बढ़ता है तो 2050 से बहुत पहले ही गर्मी कोहराम मचा सकती है. साल 2025 में तापमान औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा था. यह भी सबसे गर्म वर्षों में से एक था. वहीं, नेचर जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट भी इसी खतरे की ओर इशारा करती है. इसके अनुसार 'साल 2041–2070 तक भारत में हीट स्ट्रेस वाले दिनों की संख्या में इजाफा होगा.

भारत में साल दर साल कैसे बढ़ रहा तापमान?, साल 2026 में कितना सताएगी गर्मी, स्वास्थ्य समेत अन्य सेक्टरों पर क्या पड़ रहा असर?. ईटीवी भारत की इस Analysis में सिलसिलेवार तरीके से इन सभी सवालों के जवाब जानेंगे...

सबसे पहले ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी रिपोर्ट के बारे में जानेंगे

1-अगर ग्लोबल वार्मिंग का लेवल 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है तो साल 2050 तक दुनिया की आधी आबादी (3 अरब 79 करोड़) भीषण गर्मी में जीने को मजबूर होगी. जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार यह काफी हद तक मुमकिन भी है.

2-स्टडी में दावा किया गया है कि जब दुनिया पेरिस एग्रीमेंट (जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कानूनी अंतरराष्ट्रीय संधि) में तय 1.5°C तापमान के टारगेट को पार कर जाएगी तो गर्मी के असर जल्दी महसूस होने लगेंगे.

3-साल 2010 में दुनिया की 23% आबादी बहुत ज्यादा गर्मी में जी रही थी. जबकि अब स्थिति काफी खराब है. मौजूदा समय करीब 41% आबादी तपिश से परेशान है.

4-नाइजीरिया, साउथ सूडान, लाओस और ब्राजील में खतरनाक रूप से गर्म तापमान में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी होगी. इंसानों पर इसका बुरी तरह असर होगा.

5-स्टडी के अनुसार बढ़ते तापमान का सबसे ज्यादा असर भारत, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान और फिलीपींस में होगा.

6-ऑस्ट्रिया और कनाडा में तापमान दोगुना हो जाएगा. इसके अलावा UK, स्वीडन, फिनलैंड में 150%, नॉर्वे में 200% और आयरलैंड में 230% तक गर्मी बढ़ जाएगी.

तापमान में बढ़ोतरी से कई देशों में मचेगा हाहाकार : स्टडी के अनुसार ऑस्ट्रिया, कनाडा, स्वीडन आदि देशों में मौजूदा से थोड़ा भी तापमान बढ़ेगा तो वहा हाहाकर मच सकता है. इसके पीछे का कारण यह है कि इन देशों का इंफ्रास्ट्रक्चर ज्यादातर ठंडे माहौल के लिए ही हैं. जिन देशों के पास गर्मी को मैनेज करने के लिए ज्यादा साधन, क्षमता और पैसा है उनकी तुलना में कम क्षमता वाले देशों में काफी नुकसान हो सकता है.

अगले 5 सालों में करनी होगी खास तैयारी : ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी रिपोर्ट में इंजीनियरिंग साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जीसस लिजाना ने बढ़ते तापमान से निपटने के लिए खास तैयारी करने की बात कही है. उनका कहना है कि कूलिंग और हीटिंग की डिमांड में ज्यादातर बदलाव 1.5 डिग्री सेल्सियस की लिमिट तक पहुंचने से पहले होते हैं.

ऐसे में अनुकूलन उपाय करने की जरूरत है. कई घरों में अगले 5 वर्षों में एसी लगवाने की जरूरत पड़ सकती है. उनका दावा है कि अगर हम ग्लोबल वार्मिंग के 2.0 लेवल पर पहुंचते हैं तो उसके बाद भी तापमान बढ़ता रहेगा.

नेचर जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट पर भी करिए गौर : नेचर जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भारत में साल 1971–2000 की तुलना में वर्ष 2041–2070 तक हर साल हीट स्ट्रेस के दिनों की संख्या बढ़ेगी. यह 50 दिनों से ज्यादा भी हो सकती है. बढ़ते तापमान और उमस इंसानों के लिए खतरनाक स्थिति पैदा करेंगे.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्टडी में शामिल आईआईटी रुड़की के डिपार्टमेंट ऑफ हाइड्रोलॉजी के वैज्ञानिक डॉक्टर अंकित अग्रवाल का मानना है कि लोगों को असहनीय गर्मी की सामना करना पड़ेगा. ग्लोबल वार्मिंग इफेक्ट के कारण दिल्ली, सियोल, टोक्यो, बीजिंग, कराची, ढाका, मनीला और जकार्ता जैसे शहरों में रहने वाले लोग भीषण गर्मी से परेशान रहेंगे.

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