अजय कुमार बियानी
नेतृत्व वही होता है जो केवल आदेश न दे, बल्कि संवाद करे; केवल दिशा न दिखाए, बल्कि मन की उलझनों को भी सुलझाए। परीक्षा पे चर्चा 2026 में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विद्यार्थियों से संवाद इसी सच्चे नेतृत्व का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। यह कार्यक्रम कोई औपचारिक आयोजन नहीं था, न ही परीक्षा से पहले दिया गया कोई सामान्य भाषण—यह करोड़ों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के मन में जमी आशंकाओं, भय और दबाव को हल्का करने का एक मानवीय प्रयास था।
आज की शिक्षा व्यवस्था में परीक्षा केवल ज्ञान की कसौटी नहीं रही, वह सामाजिक अपेक्षाओं, पारिवारिक सपनों और आत्ममूल्यांकन का बोझ भी बन चुकी है। ऐसे समय में जब प्रधानमंत्री यह कहते हैं कि “परीक्षा जीवन नहीं होती, जीवन परीक्षा से बड़ा होता है”, तो यह वाक्य मात्र प्रेरक कथन नहीं रहता, बल्कि विद्यार्थियों के लिए मानसिक राहत का सूत्र बन जाता है। यह संदेश उन्हें यह समझाता है कि असफलता अंत नहीं है और सफलता केवल अंकों से तय नहीं होती।
प्रधानमंत्री के शब्दों की सबसे बड़ी ताकत यही रही कि उन्होंने विद्यार्थियों से ऊपर से नहीं, बराबरी से बात की। उन्होंने डर को नकारा नहीं, बल्कि उसे समझा; तनाव को हल्के में नहीं लिया, बल्कि उससे उबरने के उपाय बताए। जब देश का नेतृत्व यह स्वीकार करता है कि परीक्षा के दिनों में घबराहट स्वाभाविक है, तो विद्यार्थी स्वयं को अकेला नहीं महसूस करता। उसे यह भरोसा मिलता है कि उसकी भावनाएँ समझी जा रही हैं।
परीक्षा पे चर्चा का मूल संदेश यह रहा कि तुलना से बचिए। “कौन आगे जा रहा है, किसके कितने नंबर आएंगे”—इन सवालों में उलझकर विद्यार्थी अपनी ऊर्जा खो देता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि हर बच्चे की क्षमता अलग होती है, हर किसी की गति अलग होती है। महत्वपूर्ण यह नहीं कि कोई और क्या कर रहा है, महत्वपूर्ण यह है कि आपने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया या नहीं। यह दृष्टिकोण विद्यार्थियों को स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की ओर ले जाता है, जहाँ लक्ष्य उत्कृष्टता होती है, न कि दूसरों को पीछे छोड़ना।
आज का विद्यार्थी केवल किताबों से नहीं जूझ रहा, वह सोशल मीडिया, अपेक्षाओं और भविष्य की अनिश्चितताओं से भी संघर्ष कर रहा है। ऐसे में यह संदेश कि “चिंता पालना समाधान नहीं है” अत्यंत प्रासंगिक बन जाता है। प्रधानमंत्री का यह आग्रह कि तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दें, विद्यार्थियों को मानसिक संतुलन का महत्व समझाता है। क्योंकि शांत मन ही बेहतर सोच सकता है, और बेहतर सोच ही बेहतर परिणाम की ओर ले जाती है।
यह संवाद केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी एक आईना था। अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश भी गया कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव न बनाया जाए। उन्हें अंक मशीन नहीं, संवेदनशील मनुष्य समझा जाए। जब परिवार और शिक्षक सहयोगी बनते हैं, तब विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।
प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि परीक्षा केवल एक पड़ाव है, पूरा सफर नहीं। जीवन में सीखने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। एक परीक्षा न तो किसी को महान बनाती है, न ही असफल। यह सोच विद्यार्थियों को दीर्घकालिक दृष्टि देती है, जहाँ वे केवल तात्कालिक परिणामों में नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व के विकास में विश्वास रखते हैं।
Pariksha Pe Charcha 2026 इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि भारत का नेतृत्व केवल नीतियों और योजनाओं तक सीमित नहीं है, वह देश के भविष्य—युवाओं—की मानसिक स्थिति को भी उतनी ही गंभीरता से लेता है। यह स्वीकार करता है कि मजबूत राष्ट्र का निर्माण केवल आर्थिक या तकनीकी प्रगति से नहीं होता, बल्कि संतुलित, आत्मविश्वासी और सकारात्मक सोच वाले नागरिकों से होता है।
जब प्रधानमंत्री विद्यार्थियों से कहते हैं कि “अच्छा प्रयास करो, नंबर अपने आप अच्छे होंगे”, तो यह उन्हें कर्म पर केंद्रित करता है। परिणाम की चिंता से मुक्त होकर किया गया प्रयास न केवल बेहतर प्रदर्शन देता है, बल्कि सीखने की प्रक्रिया को भी आनंददायक बनाता है। यही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है—ज्ञान के साथ-साथ जीवन कौशल का विकास।
आज देश के कोने-कोने में लाखों विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। उनके मन में आशाएँ भी हैं, आशंकाएँ भी। ऐसे समय में परीक्षा पे चर्चा का यह संदेश उनके लिए संबल बनता है। यह उन्हें याद दिलाता है कि वे अकेले नहीं हैं, पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
अंततः यह कहा जा सकता है कि परीक्षा पे चर्चा 2026 केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सकारात्मक आंदोलन है—ऐसा आंदोलन जो परीक्षा को भय से मुक्त कर उसे आत्मविश्वास और सीख का माध्यम बनाना चाहता है। यह भारत के नेतृत्व की उस सोच को दर्शाता है, जो परिणाम से पहले प्रयास को महत्व देती है और अंक से पहले आत्मबल को।
सभी विद्यार्थियों के लिए यही कामना है कि वे पूरे मनोयोग से परीक्षा दें, स्वयं पर विश्वास रखें और यह याद रखें कि जीवन की असली परीक्षा इंसानियत, धैर्य और निरंतर प्रयास में होती है।
अग्रिम शुभकामनाएँ देश के हर छात्र को।
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