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दुबले पतले बच्चों का वजन कैसे बढ़ाएं? डॉक्टर ने बताया क्या खिलाने पर होने लगेगा Weight Gain How to help underweight children gain weight? The doctor explained what to feed them to promote weight gain.

 


बहुत से बच्चे जन्म से ही बेहद कमजोर और पतले होते हैं. ऐसे में बच्चे के खानपान में बदलाव करके उसका वजन (Weight Gain) बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है. अगर बच्चे का वजन जरूरत से ज्यादा कम है तो बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है, बच्चे के वृद्धि और विकास पर असर पड़ सकता है और हड्डियों में दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. जिसमें डॉक्टर ने बताया है कि ऐसी कौन सी 5 चीजें हैं जिन्हें खिलाने पर दुबले और कमजोर बच्चे का वजन बढ़ता है और शरीर मजबूत बनता है सो अलग. आप भी इन फूड्स को बच्चे की डाइट का हिस्सा बना सकते हैं.

बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए क्या खिलाएं

केला – बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए उसे केला (Banana) खिलाया जा सकता है. यह कैलोरी और इंस्टेंट एनर्जी का अच्छा स्त्रोत होता है. इसे पचाना भी आसान होता है. ऐसे में आप बच्चे के नाश्ते या स्नैक्स में केला शामिल कर सकते हैं.

घी – रोटी, दाल या खिचड़ी में घी लगाकर बच्चे को खिला सकते हैं. इनमें 1 से 2 चम्मच घी डालकर बच्चे को खिलाएं. इससे खाने की कैलोरी तो बढ़ती ही है, साथ ही घी हेल्दी फैट्स का एक अच्छा स्त्रोत भी है.

अंडे – बच्चों का वजन बढ़ाने के लिए उन्हें अंडे भी खिलाए जा सकते हैं. इसमें मौजूद हाई क्वालिटी प्रोटीन बच्चों की ग्रोथ (Growth) और इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद है.

सूखे मेवे और पीनट बटर – नट्स और पीनट बटर में प्रोटीन और हेल्दी फैट्स होते हैं. इससे शरीर को एनर्जी मिलती है और वजन भी बढ़ता है. इस बात का ध्यान रखें कि सूखे मेवे हमेशा भिगोकर या पीसकर ही बच्चों को खिलाएं जिससे इनके गले में अटकने का खतरा कम हो जाए.

दही और पनीर – बच्चों को दही और पनीर खिलाएं. इनमें मौजूद प्रोटीन बच्चे की ग्रोथ के लिए अच्छे हैं. दही से बच्चों को प्रोबायोटिक्स भी मिलते हैं जो पाचन को दुरुस्त रखते हैं.

बच्चा ज्यादा पतला हो तो क्या होता है

अगर बच्चा ज्यादा पतला (Thin Child) या कमजोर होता है तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है जिससे बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है.

बच्चे के शरीर में थकान रहती है और एनर्जी की कमी रहती है.

बच्चे की ग्रोथ ठीक तरह से नहीं हो पाती है.

बच्चे की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और हड्डियों में अक्सर दर्द रहता है.

बच्चों की स्किन ड्राई हो सकती है, अनीमिया हो सकता है, बात पतले रह जाते हैं और दांतों की दिक्कतें ज्यादा होती हैं.

दुबले-पतले बच्चों में इरिटेशन, एंजाइटी और ईटिंग हैबिट्स में बदलाव ज्यादा देखे जाते हैं.

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