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मराठा कार्ड Vs डेवलपमेंट: बीएमसी में किसका राज? 10 प्वाइंट में जानें मुंबई के चुनावी दंगल की अहमियतMaratha card vs. Development: Who will rule the BMC? Understand the significance of Mumbai's electoral battle in 10 points.

 

मुंबई: मुंबई में बीएमसी चुनावों के लिए 15 जनवरी यानी गुरुवार को वोट डाले जाएंगे। बुधवार को चुनाव आयोग ने मतदान की सभी तैयारियां पूरी कर लीं। मुंबई के चुनावी दंगल में सिर्फ महायुति और एमवीए की बड़ी पार्टियां को मिलाकर कुल 19 दलों ने ताल ठोंकी है। पिछले साल विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की शानदार जीत के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में बीजेपी-शिवसेना को जहां जीत की उम्मीद है तो वहीं ठाकरे भाइयों को कमबैक का भरोसा है। मुंबई बीएमसी में कुल 227 वार्ड है। इन वार्ड से नगरसेवक यानी पार्षद बनने के लिए लगभग 1,700 उम्मीदवार मैदान में हैं।


 बीएमसी चुनाव की 10 बड़ी बातें1700 से अधिक कैंडिडेट मैदान में हैं इनमें 822 पुरुष और 878 महिलाएं हैं।

7 प्रत्याशी औसतन बीएमसी के हर के वार्ड में लड़ रहे हैं। 11 नंबर वार्ड में दो कैंडिडेट हैं।

बीएमसी में 51 ऐसे वार्ड हैं जहां पर 10 से अधिक कैंडिडेट में मुकाबला है।

2017 के मुंबई बीएमसी चुनावों में 55 फीसदी वोटिंग डाले गए थे।

19 दलों ने मुंबई के चुनावी दंगल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

2017 में आखिरी बार चुनाव हुए थे। लंबे समय बाद मुंबईकर बीएमसी चुनाव के लिए वोट डालेंगे।

बीएमसी चुनावों में सबसे ज्यादा 163 सीटों पर उद्धव ठाकरे लड़ रहे हैं।

कांग्रेस ने कुल 152 कैंडिडेट उतारे हैं, जबकि बीजेपी के 137 प्रत्याशी मैदान में हैं।

राज ठाकरे की अगुवाई वाली मनसे 52 सीटों पर लड़ रही है।

कुल कैंडिडेट की संख्या में एकनाथ शिंदे की पार्टी पांचवें नंबर पर है। पार्टी ने 91 प्रत्याशी उतारे हैं।

कौन बनेगा किंग: फडणवीस या फिर ठाकरे ब्रदर्समुंबई बीएमसी के चुनावों में अगर बीजेपी जीत हासिल करती है तो निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कद और बढ़ जाएगा। राष्ट्रीय राजनीति के साथ बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व की नजर में उनकी अहमियत और बढ़ जाएगा। वह उसे यात्रा को पूरा करेंगे जो कभी प्रमोद महाजन ने शुरू की थी। अगर ठाकरे ब्रदर्स (उद्धव ठाकरे-राज ठाकरे) कमबैक करते हुए अपना गढ़ बचा लेते हैं तो निश्चित तौर पर एकनाथ शिंदे के लिए चुनौती बढ़ेगी। ऐसे में मुंबई के जनादेश को बेहद अहम माना जा रहा है। ठाकरे ब्रदर्स की जीत पर मराठी अस्मिता की राजनीति और तेज हो सकती है। पिछले चुनावों में बीजेपी अविभाजित शिवसेना से सिर्फ 2 सीट पीछे रही थी। 1997 से लगातार बीएमसी पर शिवसेना का राज है। आज तक बीजेपी अपना मेयर नहीं बैठा पाई है।

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