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उत्तर प्रदेश में हटेंगे अनावश्यक नियम, सीएम योगी का बड़ा संकेत; जनता के साथ व्यापारियों को भी राहतUnnecessary regulations will be removed in Uttar Pradesh; CM Yogi gives a big indication; relief for both the public and traders.

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  स्पष्ट कहा कि प्रदेश में प्रशासन का चेहरा अब नियंत्रण नहीं, बल्कि भरोसे पर आधारित होना चाहिए। अनावश्यक नियम, प्रक्रियाएं और अनुमतियां हटाकर आम नागरिक और उद्यमियों को राहत देना सरकार की प्राथमिकता है। कंप्लायंस रिडक्शन और डी-रेगुलेशन फेज-2 की उच्चस्तरीय समीक्षा में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि हर सुधार का असर कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर नजर आना चाहिए।


मुख्यमंत्री ने अपने आवास में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि कंप्लायंस रिडक्शन फेज-1 में प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया जाना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन असली चुनौती फेज-2 में इन सुधारों को स्थायी और संस्थागत रूप देना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि डी-रेगुलेशन का अर्थ नियंत्रण समाप्त करना नहीं, बल्कि अनावश्यक नियंत्रण हटाकर जरूरी नियमों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। बैठक में बताया गया कि फेज-2 के तहत नौ थीम, 23 प्राथमिकता वाले क्षेत्र और वैकल्पिक प्राथमिकता वाले क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं।

भूमि उपयोग से जुड़े मामलों में लैंड यूज में बदलाव जैसी जटिल अनुमतियों को समाप्त या सरल करने पर काम हो रहा है, ताकि किसानों और भू-स्वामियों को राहत मिल सके।

भवन निर्माण और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में नक्शा पास, लेआउट अप्रूवल और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जैसी प्रक्रियाओं को जोखिम-आधारित प्रणाली (रिस्क-बेस्ड सिस्टम) पर लाने, सेल्फ-सर्टिफिकेशन और डीम्ड अप्रूवल को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने अलग-अलग विभागों की अनुमतियों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्म पर लाकर स्पष्ट समय सीमा तय करने पर जोर दिया, जिससे उद्योगों और नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। ऊर्जा, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में भी आनलाइन व आटो-अप्रूवल सिस्टम को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सुधार केवल निवेश और उद्योग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घर बनाने, बिजली-पानी कनेक्शन और रोजमर्रा की सेवाओं से जुड़ी आम जनता की परेशानियां कम करने के लिए हैं। सभी विभाग तय समय सीमा में सुधार लागू करें और नियमित निगरानी के जरिए जवाबदेही तय की जाए।

ऊर्जा सेक्टर के संदर्भ में बताया गया कि बिजली कनेक्शन, लोड बढ़ाने और अन्य तकनीकी अनुमतियों की प्रक्रिया सरल करते हुए आनलाइन और आटो-अप्रूवल सिस्टम को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सके।

पर्यावरण संबंधी अनुमतियों पर बताया गया कि कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए अनावश्यक क्लीयरेंस समाप्त कर विश्वास-आधारित प्रणाली (ट्रस्ट-बेस्ड सिस्टम) अपनाया जा रहा है, जबकि उच्च जोखिम वाले मामलों में पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलन बनाए रखते हुए स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रही है।

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