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न इधर न उधर… UGC विवाद पर अखिलेश-मायावती ने बनाया संतुलन, बाकी पार्टियों का क्या रुख?Neither here nor there… Akhilesh and Mayawati strike a balance on the UGC controversy, but what is the stance of other parties?

 

UGC के नए नियमों को लेकर देश में बवाल मचा है. इसका एपिसेंटर उत्तर प्रदेश है. सवर्ण छात्र सड़क पर उतरकर UGC के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. वे नए नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. वहीं कई राजनीतिक दलों ने भी अपना स्टैंड क्लीयर कर दिया है. इसमें सपा से लेकर बसपा तक शामिल है. किसने क्या कहा है, आइए जानते हैं.


इस पूरे विवाद पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, दोषी बचे नहीं और निर्दोष फंसे नहीं. उन्होंने इसे बीजेपी की चाल बताया है. अखिलेश ने कहा कि इन नियमों से पीडीए समाज को कोई राहत नहीं मिलेगी, कोईं अधिकतर संस्थाओं पर गैर पीडीए समाज के लोग काबिज हैं. अखिलेश का यह एक तरह से संतुलित बयान है, जिससे सवर्ण समाज खुश रहे और वोटबैंक को भी आंच न आए.

मायावती का बैलेंस बयान

वहीं, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने नए नियम का विरोध करने वालों पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के केवल जातिवादी मानसिकता के ही लोगों द्वारा इसे अपने विरुद्ध भेदभाव व षडयंत्रकारी मानकर इसका जो विरोध किया जा रहा है, तो यह कतई भी उचित नहीं है.

उन्होंने कहा कि पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता और देश में फिर सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता. इस ओर भी सरकारों व सभी संस्थानों को ज़रूर ध्यान देना चाहिए. साथ ही, ऐसे मामलों में दलितों व पिछड़ों को भी, इन वर्गों के स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी क़तई नहीं आना चाहिए, जिनकी आड़ में ये लोग आएदिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं अर्थात् इन वर्गों के लोग ज़रूर सावधान रहें.

कांग्रेस का क्या स्टैंड?

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है. यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा, जिस तरह से उन्होंने अपनी नाकामी छिपाने के लिए हिंदू-मुस्लिम किया, अब UGC के ज़रिए वे लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं. मुझे लगता है कि अब वे जाने वाले हैं. वे अपने आखिरी दौर में हैं. वे किसी भी तरह सत्ता में बने रहना चाहते हैं. वे हिंदुओं में फूट डालना चाहते हैं. कांग्रेस पार्टी ऐसा नहीं होने देगी, कांग्रेस के लिए सब एक हैं.

चंद्रशेखर ने क्या कहा?

आजाद समाज पार्टी के मुखिया और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने UGC के नए नियमों का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वो लोगों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं. इन नियमों को और सख्त करने की ज़रूरत है. नगीना सांसद ने कहा कि यूजीसी की गाइडलाइंस के बारे में किसी को कुछ पता ही नहीं है.

तेज प्रताप ने किया समर्थन

जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने UGC नियमों का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत, UGC ने गरीब, दलित, पिछड़े और अति पिछड़े समुदायों के छात्रों के फायदे के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. अब हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी होगी ताकि SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को तुरंत सुना जा सके. यह कानून सभी छात्रों के लिए समानता और अधिकारों को मज़बूत करता है और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है.

तेज प्रताप यादव ने आगे कहा कि कुछ आलोचकों को शायद यह एहसास नहीं है कि दलित, आदिवासी और पिछड़े समुदाय भी बड़े सनातन समाज का हिस्सा हैं और यह कानून इन समूहों को एक ही देश के भाई-बहनों के रूप में समर्थन देता है. उन्होंने नए नियमों का स्वागत करते हुए अपनी बात खत्म की और राजनीतिक और सामाजिक समूहों से अपील की कि वे ऐतिहासिक रूप से वंचित छात्रों के अधिकारों की रक्षा करने वाले उपायों का समर्थन करें.

शिवसेना का क्या रुख?

शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षा मंत्री के मौखिक आश्वासन लिखित गाइडलाइंस के मुकाबले कानून की जांच में टिक नहीं पाएंगे, तो उनके स्पष्टीकरण का क्या फायदा. UGC गाइडलाइंस का गलत इस्तेमाल नहीं होगा, इस बारे में इन मौखिक आश्वासनों के बजाय, एक मंत्री के तौर पर उन्हें इसे वापस ले लेना चाहिए.

सीएम स्टालिन किसके साथ?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि UGC के नए नियम सपोर्ट के लायक हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इन रेगुलेशंस या उनके मुख्य मकसद को कमजोर करने के लिए दबाव नहीं बनने देना चाहिए. स्टालिन ने कहा कि जैसा कि Mandal Commission की सिफारिशों के आधार पर रिजर्वेशन को लागू करने के दौरान देखा गया था, मौजूदा UGC_Rollback का विरोध उसी पुरानी सोच से प्रेरित है. केंद्र सरकार को ऐसे दबाव को इन रेगुलेशंस या उनके मुख्य मकसद को कमजोर करने की इजाज़त नहीं देनी चाहिए.

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