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ट्रेन में अश्लीलता करने वाले मप्र के जज की बर्खास्तगी की बहाली सुप्रीम कोर्ट में स्थगित, मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाबThe reinstatement of the Madhya Pradesh judge who committed indecent acts on a train has been stayed by the Supreme Court, which has issued a notice to the Madhya Pradesh government seeking a response.

 सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में एक ट्रेन यात्रा के दौरान महिला यात्री के बर्थ के सामने पेशाब करने और अश्लील हरकतें करने के आरोपी एक न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी बहाल करने संबंधी आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उक्त न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को रद कर उनकी बहाली का निर्देश दिया था।


सर्वोच्च अदालत ने मामले को अत्यंत चौंकाने वाला बताया

न्यायिक अधिकारी के आचरण को घृणित करार देते हुए सर्वोच्च अदालत ने इस मामले को अत्यंत चौंकाने वाला बताया और टिप्पणी की कि ऐसे कृत्य के लिए उन्हें बर्खास्त किया जाना पूरी तरह उचित था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने न्यायिक अधिकारी और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर हाई कोर्ट की प्रशासनिक शाखा द्वारा दायर याचिका पर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश के खिलाफ है याचिका

यह याचिका पिछले वर्ष मई में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें सितंबर 2019 में जारी बर्खास्तगी आदेश को रद करते हुए न्यायिक अधिकारी को 15 दिनों के भीतर सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद निर्धारित करते हुए स्पष्ट किया कि तब तक हाई कोर्ट के विवादित आदेश का प्रभाव और संचालन स्थगित रहेगा। उल्लेखनीय है कि संबंधित न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति मार्च 2011 में सिविल जज (श्रेणी–II) के पद पर हुई थी।

क्या है मामला

यह घटना जून 2018 की है, जब न्यायिक अधिकारी ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने शराब के नशे में सहयात्रियों के साथ दुर्व्यवहार किया और एक महिला यात्री के बर्थ के सामने पेशाब किया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि यात्रियों को आपात चेन खींचनी पड़ी।

इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया, हालांकि बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। घटना के बाद जून 2018 में न्यायिक अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए सभी आरोपों से इनकार किया था।

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