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विमान हादसा : नेता इतना मूर्ख क्यों होता है ?Plane crash: Why are politicians so foolish?

 


                           • रवि उपाध्याय 

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की कल बुधवार 28 जनवरी 2026 को प्रातः उनके गृह नगर बारामती में हुई एक विमान दुर्घटना में दु:खद मृत्यु हो गई। यह दुर्घटना ग्रस्त विमान एक चार्टर्ड विमान ( निजी किराए का विमान) था और इसे उन्हीं ने किराए पर लिया था। इस असामयिक दु:खद खबर से महाराष्ट्र समेत पूरा देश स्तब्ध है। अभी आज गुरुवार सुबह तक उनके क्षतविक्षत शव की अंत्येष्टि तक नहीं हुई लेकिन नेताओं ने इस दुर्घटना के बाद सियासत शुरू कर दी। पश्चिम बंगाल की एक स्वनाम धन्य मुख्यमंत्री है उन्होंने इस दुर्घटना को साजिश बता कर उसकी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने का बयान दे डाला। 


दूसरी तरफ एक राष्ट्रीय राजनैतिक पार्टी के वयोवृद्ध राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बयान दिया है कि यह विमान दुर्घटना अननेचुरल है, इसकी जांच करानी चाहिए। अब अति बुद्धिमानु नेताजी से यह सवाल है कि नेचुरल दुर्घटना कैसी होती है ? यह पूरा देश और दुनिया जानती हैं कि दुर्घटनाएं हमेशा अननेचुरल ही होती हैं। वह अलग बात है कि उनके या उनकी पार्टी के पास नेचुरल दुर्घटना कराने की कोई जानकारी हो। देश हित में उन्हें उस जानकारी उजागर करना चाहिए या इस तरह के अहमक बयानों के लिए उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए।

जनमानस में यह सवाल उठना पूरी तरह स्वाभाविक ही है कि क्या वाकई नेता इतने ही मूर्ख होते हैं ? सबसे अधिक आश्चर्यजनक यह है कि स्वयं को फॉरेन एजुकेटेड बताने वाले एक नेता जी और एक बड़े प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए एस्पिरेंट एक नेता जी ने भी निर्ममता के घृणित बयान पर हांमी में अपना सिर हिलाना शुरू कर दिया। यह सुन कर और देख कर अफसोस होता है कि हमारे नेता कितने संवेदनशील और इंटेलिजेंट होते हैं। 

पश्चिम बंगाल की निर्मम नेता को विमान दुर्घटना के चंद मिनटों के बाद ही पीड़ित शोक संतप्त के प्रति संवेदना व्यक्त करने की बजाए उन्हें विमान दुर्घटना में साजिश दिखाई देने लगी। बयान से पता चलता है कि नेताओं के दिमाग में साजिशें कितनी कूट कूट कर भरी होती है। 

आ गए मौत पर तमाशा करने वाले 

नेताओं के ऊलजलूल बयानों को देखने सुनने के बाद क्रांतिवीर में नाना पाटेकर का बयान याद आता है जिसमें वह कहते हैं कि "आ गए मेरी मौत पर तमाशा करने वाले, ये टोपी वाले, ये सियासत करने वाले। देश के नेता इसी तरह की हरकतें करते नज़र आ रहे हैं। इस मामले में सबसे सेंसिबल बयान जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला का बयान आया है जिसमें उन्होंने कहा कि दुर्घटना की जांच होगी ही। किस की मौत कैसी लिखी है। यह ऊपर वाला जानता है।

शरद पवार का बयान

महाराष्ट्र के वरिष्ठतम नेता देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री रहे शरद पवार ने इन बयानों पर दुःख व्यक्त करते हुए अपील की है कि इस दुर्घटना पर राजनीति नहीं किया जाना चाहिए। बता दें कि शरद पवार स्व. अजीत पवार के सगे चाचा हैं। अजीत दादा पवार उनके सानिध्य में राजनीति में ता उम्र सक्रिय रहे हैं।

जांच शुरू,सबूत हैं तो सुप्रीम कोर्ट को दें 

यहां बता दें कि दुर्घटना चाहे हवाई दुर्घटना हो या सड़क दुर्घटना जांच तो होती ही है और यह जांच तकनीकी एक्सपर्ट्स द्वारा की ही जाती है। लेकिन उसमें बिना किसी प्रमाण के साजिश का एंगल बताना नेता की सोच बताती है कि वह कितनी निर्मल है। हां,यदि नेताओं के पास इस विमान दुर्घटना की साजिश का कोई सबूत है तो उन्हें इसे सुप्रीम कोर्ट में सीधे जाकर दे कर जांच में सक्रिय सहयोग अवश्य करना ही चाहिए। क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने अपने बयान में साजिश का एंगल बताते हुए यह भी कहा कि उन्हें भारत सरकार की किसी भी जांच एजेंसी पर विश्वास नहीं है। हालांकि वे न्याय पालिका को भी बिका हुआ या कंप्रोमाइज्ड बता चुकी हैं

     ब्लैक बॉक्स बरामद 

जहां तक इस बारामती विमान दुर्घटना की जांच की बात है तो दुर्घटना के कुछ देर बाद ही संबंधित एजेंसी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो द्वारा प्रारंभ की जा चुकी है। जानकारी के अनुसार DGCA (महा निदेशक नागरिक उड्डयन) ने जांच प्रारंभ कर दी है। मीडिया के अनुसार विमान का महत्वपूर्ण ब्लैक बॉक्स मिल गया है। इससे दुर्घटना का कारण पता चल सकेगा कि घटना का कारण यांत्रिक गड़बड़ी थी या कोई मानवीय गड़बड़ी थी।

    पहले भी हुई हैं ऐसी दुर्घटनाएं 

देश और दुनिया में अब तक इस तरह की 109 विमान दुर्घटनाएं हो चुकी हैं । संजय गांधी, माधवराव सिंधिया, राजेश पायलट, वायएस राजशेखर रेड्डी, गवर्नरों के साथ भी ऐसी विमान दुर्घटनाएं हो चुकीं हैं। साथ परमाणु बम के लिए काम कर रहे परमाणु वैज्ञानिक होमी भाभा की मौत भी विमान दुर्घटना में हुई थी। पर इनमें से किसी भी दुर्घटना की जांच नहीं कराई गईं। इनको लेकर साज़िश के आरोप भी लगते रहे हैं। यहां तक कि कई मामले ऐसे हैं जिनमें जांच के लिए जरूरी पोस्टमार्टम भी नहीं कराए गए। इसमें सब से उल्लेखनीय मामला पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री का है। उनकी ताशकंद में हुई संदिग्ध मृत्यु के बाद उनका पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया।


( लेखक राजनैतिक समीक्षक और एक लोकप्रिय व्यंग्यकार भी हैं। )


29012026

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