अजय कुमार बियानी
इंजीनियर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नई पीढ़ी केवल संगठन का विस्तार नहीं, बल्कि समाज के भीतर संस्कारों को पुनर्जीवित करने की एक सशक्त और दूरदर्शी पहल है। यह पीढ़ी बचपन से ही ऐसे मूल्यों के साथ गढ़ी जा रही है, जो आगे चलकर न केवल व्यक्तिगत जीवन को दिशा देते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र को भी मजबूती प्रदान करते हैं। संघ का यह प्रयास विचारों की नहीं, चरित्र निर्माण की यात्रा है।
बचपन वह समय होता है, जब मन मिट्टी की तरह कोमल होता है। इस अवस्था में जो संस्कार डाले जाते हैं, वही जीवन भर का आधार बनते हैं। संघ इसी सत्य को केंद्र में रखकर बच्चों में अनुशासन, देशप्रेम, सेवा भाव और सामाजिक समरसता जैसे गुणों का बीजारोपण करता है। खेल, प्रार्थना, गीत, सामूहिक अभ्यास और सेवा कार्यों के माध्यम से बच्चों को सिखाया जाता है कि राष्ट्रसेवा केवल शब्दों में नहीं, आचरण में होती है।
इस प्रक्रिया में परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। घर के बड़े सदस्य—माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी—जब स्वयं अपने व्यवहार से संस्कारों को जीते हैं, तब बच्चे उन्हें स्वाभाविक रूप से अपनाते हैं। संघ का मानना है कि समाज का स्थायी परिवर्तन घर से ही शुरू होता है। जब परिवार और संगठन मिलकर बच्चों को दिशा देते हैं, तब संस्कार केवल सीख नहीं, जीवन शैली बन जाते हैं।
इंदौर के निपानिया क्षेत्र में, विशेष रूप से छत्रसाल नगर, जिला जगन्नाथ क्षेत्र में संचालित संघ की गतिविधियाँ इस सोच का सजीव उदाहरण हैं। यहाँ नियमित रूप से होने वाली शाखाओं में बच्चों और युवाओं को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सेवा कार्य, सामाजिक सहभागिता और अनुशासित जीवन के माध्यम से यह क्षेत्र संस्कारों की प्रयोगशाला बनता जा रहा है।
संघ की नई पीढ़ी को यह समझाया जाता है कि देशसेवा किसी पद, पहचान या प्रशंसा की मोहताज नहीं होती। स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, समाज के कमजोर वर्ग की सहायता और आपसी सहयोग—ये सभी देशसेवा के ही रूप हैं। यह भाव बच्चों के मन में बैठाया जाता है कि हर छोटा कार्य भी यदि निस्वार्थ भाव से किया जाए, तो उसका प्रभाव व्यापक होता है।
यह प्रयास किसी तात्कालिक लाभ या स्वार्थ से प्रेरित नहीं है। इसका मूल उद्देश्य समाज में निस्वार्थता, सेवा और कर्तव्यबोध की भावना को मजबूत करना है। आज जब समाज में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी होता जा रहा है, तब संघ की यह पहल सामूहिकता और जिम्मेदारी का संदेश देती है।
संस्कारों से सुसज्जित यह नई पीढ़ी केवल भविष्य की कल्पना नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता है। निपानिया, छत्रसाल नगर और जिला जगन्नाथ जैसे क्षेत्रों में पनप रही यह चेतना बताती है कि यदि बचपन से ही सही दिशा दी जाए, तो समाज का स्वरूप बदला जा सकता है। यही संस्कार आगे चलकर सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र की नींव बनेंगे।
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