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विदेशी आय को सीधे भारतीय मुद्रा में बदलकर भरण–पोषण तय नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्टMaintenance cannot be determined by directly converting foreign income into Indian currency: Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने हालिया फैसले में स्पष्ट किया कि पति की विदेशी आय को यांत्रिक तरीके से भारतीय मुद्रा में परिवर्तित कर पत्नी के भरण–पोषण की राशि तय नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि पति विदेश में कमाता है, उसकी आय को सीधे रुपये में बदलकर भारतीय अदालतों द्वारा विकसित फार्मूलों को लागू करना उचित नहीं होगा जब तक कि मामले की परिस्थितियों पर समुचित रूप से विचार न किया जाए। जस्टिस अमित महाजन ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें पति और पत्नी दोनों ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पति को पत्नी को 50,000 प्रतिमाह अंतरिम भरण–पोषण देने का निर्देश दिया गया।



पत्नी का कहना था कि पति अमेज़न में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत है और उसकी वार्षिक आय पहले 1,50,300 डॉलर थी जो बढ़कर 2,32,000 डॉलर हो गई। इसके आधार पर उसने दावा किया कि पति की मासिक आय लगभग 14.61 लाख है। पत्नी ने यह भी कहा कि वह दिसंबर 2021 से बेरोज़गार है। उसकी कोई आय नहीं है जबकि पति पर उसके अलावा कोई अन्य आश्रित नहीं है। वहीं पति ने तर्क दिया कि पत्नी स्वयं उच्च शिक्षित है और बैंक ऑफ अमेरिका में कार्यरत थी, जहां वह लगभग 9 लाख प्रतिवर्ष कमा रही थी। उसके अनुसार, पत्नी ने जानबूझकर अपनी नौकरी छोड़ी और स्वयं को बेरोज़गार रखा। अदालत ने कहा कि अंतरिम भरण–पोषण का निर्धारण गणितीय सटीकता का विषय नहीं है विशेषकर तब, जब पति–पत्नी में से कोई एक विदेश में कार्यरत हो और आय का पूर्ण व स्पष्ट खुलासा न किया गया हो। ऐसे मामलों में आकलन अनुमान और विवेकपूर्ण मूल्यांकन पर आधारित होता है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि अंतरिम चरण में अदालत से किसी विस्तृत या अंतिम जांच की अपेक्षा नहीं की जाती, बल्कि उपलब्ध सामग्री, परिस्थितियों, जीवनशैली और कमाने वाले पक्ष की स्वीकार्य आय क्षमता के आधार पर एक युक्तिसंगत राशि तय की जाती है। साथ ही अदालत ने कहा कि पति का पत्नी का भरण–पोषण करना उसका दायित्व है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि उसकी पूरी आय को समान रूप से या अनुपातिक रूप से भरण–पोषण में बदल दिया जाए। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा तय 50,000 प्रतिमाह की राशि को अपर्याप्त मानते हुए इसे बढ़ाकर 1,00,000 प्रतिमाह कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि यह बढ़ी हुई अंतरिम भरण–पोषण राशि आवेदन दाखिल करने की तिथि से देय होगी। हालांकि अब तक दी गई किसी भी राशि का समायोजन किया जाएगा।

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