दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में YSRCP नेता वाई. वी. सुब्बा रेड्डी को तिरुपति लड्डू में मिलावट मामले की मीडिया रिपोर्टिंग के खिलाफ दायर मानहानि केस में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस अमित बंसल रेड्डी के पक्ष में और प्रतिवादियों के खिलाफ विवादित प्रकाशनों या लेखों पर एकतरफा अंतरिम रोक लगाने के पक्ष में नहीं थे। कोर्ट ने कहा कि पहली नज़र में प्रतिवादियों को उनके लेखों के संबंध में अपना बचाव पेश करने का मौका देना ही उचित होगा।
कोर्ट ने कहा, "हालांकि, यह साफ किया जाता है कि आज के बाद किए गए किसी भी प्रकाशन/पोस्ट/लेख पर इस कोर्ट की नज़र रहेगी और इसके अपने नतीजे होंगे।" तिरुपति लड्डू में मिलावट मामले में आरोप हैं कि मंदिर के मशहूर प्रसाद के लिए अशुद्ध घी, जिसमें शायद जानवरों की चर्बी या मछली का तेल मिला था, इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र SIT बनाने का आदेश दिया। यह केस रेड्डी और उनकी पत्नी ने दायर किया, जिसमें तर्क दिया गया कि प्रतिवादियों ने तिरुमाला के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के लिए घी की खरीद में उनके द्वारा की गई गलतियों का आरोप लगाते हुए मानहानिकारक बयान दिए। जानकारी के लिए रेड्डी तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की मैनेजमेंट कमेटी के बोर्ड के चेयरमैन थे और उन्होंने जून, 2019 से अगस्त, 2023 तक यह पद संभाला था। कोर्ट ने कहा कि यह तय है कि एकतरफा अंतरिम रोक केवल असाधारण परिस्थितियों में ही दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा, "इसलिए इस स्टेज पर कोर्ट प्रतिवादियों के खिलाफ विवादित प्रकाशनों/पोस्टों/लेखों पर एकतरफा अंतरिम रोक लगाने के पक्ष में नहीं है।" जस्टिस बंसल ने रेड्डी की अंतरिम रोक की याचिका पर केस और आवेदन में समन जारी किए। अब इस मामले की सुनवाई 29 जनवरी को होगी।

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