बिहार की राजनीतिक चर्चाओं में लगातार बने रहने वाले लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। अपनी पार्टी जन शक्ति जनता दल (JJD) की प्रस्तावित कार्यकारिणी की बैठक से ठीक पहले, तेज प्रताप ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। पार्टी की बिहार राज्य इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
JJD के राष्ट्रीय महासचिव मोतीलाल राय द्वारा जारी एक आधिकारिक नोटिफिकेशन में यह साफ किया गया है कि बिहार राज्य संगठन को भंग किया जा रहा है। इस फैसले के बाद, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि 1 फरवरी को होने वाली कार्यकारिणी बैठक में तेज प्रताप कोई बड़ा और चौंकाने वाला फैसला ले सकते हैं।
बैठक से पहले क्यों भंग की गई प्रदेश इकाई?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बिहार राज्य संगठन को भंग करना संगठनात्मक पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है। तेज प्रताप यादव लंबे समय से यह संकेत दे रहे हैं कि वह पार्टी के अंदर अनुशासन, सक्रियता और जमीनी स्तर पर मजबूती चाहते हैं। इसलिए, पुरानी संरचना को नई लीडरशिप और नई रणनीति से बदलने की योजना हो सकती है।
पटना में 1 फरवरी को होने वाली JJD की कार्यकारिणी की बैठक में संगठनात्मक विस्तार, अनुशासन, चुनावी रणनीति और भविष्य की राजनीतिक योजनाओं पर चर्चा होगी। बिहार यूनिट को भंग करने के फैसले को इसी मीटिंग से जोड़ा जा रहा है।
पश्चिम बंगाल पर भी नजर
तेज प्रताप यादव पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि जन शक्ति जनता दल सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी पश्चिम बंगाल में भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, खासकर उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां बिहारी आबादी की अहम भूमिका है। इसलिए, बिहार संगठन का पुनर्गठन करना और पार्टी को एक साफ दिशा देना तेज प्रताप की रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।
नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की तैयारी
तेज प्रताप यादव लगातार कहते रहे हैं कि उनकी पार्टी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में शामिल नहीं होगी। JJD का फोकस सकारात्मक मुद्दों, सामाजिक न्याय और युवाओं की भागीदारी पर होगा। राज्य इकाई को भंग करने के फैसले को भी एक 'रीसेट बटन' के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका मकसद पार्टी को फिर से सक्रिय करना और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना है।
आरजेडी से निकाले जाने के बाद बनाई अपनी पार्टी
गौरतलब है कि मई 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से निकाले जाने के बाद, तेज प्रताप यादव ने अपनी खुद की पार्टी JJD बनाई और बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद, वह राजनीतिक रूप से प्रयोग करते रहते हैं और प्रासंगिक बने रहने में कामयाब रहे हैं। हाल ही में मकर संक्रांति के दौरान उनके द्वारा आयोजित भोज ने भी काफी चर्चा बटोरी थी, इसके बाद ये भी अटकलें लगने लगी की तेज प्रताप एनडीए के साथ जा सकते हैं।
एक फरवरी पर नजर
अब सभी की नजरें 1 फरवरी को होने वाली कार्यकारी समिति की बैठक पर हैं। क्या तेज प्रताप नई राज्य नेतृत्व की घोषणा करेंगे? क्या चुनाव रणनीति को लेकर कोई बड़ी घोषणा होगी? या फिर किसी नए राजनीतिक गठबंधन की नींव रखी जाएगी?

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