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दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित हेरफेर के मामले में JEE स्टूडेंट्स की याचिका खारिज की, एक माह की सामुदायिक सेवा करने का आदेशThe Delhi High Court dismissed the petition filed by JEE students in the alleged manipulation case and ordered them to perform one month of community service.

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने JEE (मेन) 2025 परीक्षा में उत्तर पत्रक में कथित हेरफेर को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के निष्कर्षों को चुनौती देने वाले दो स्टूडेंट्स की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने उन पर लगाए गए 30,000- 30,000 के जुर्माने को हटाते हुए केवल फटकार लगाई और एक माह की सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने सिंगल जज के 22 सितंबर, 2025 के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन दंड को सीमित करते हुए स्टूडेंट्स को क्रमशः वृद्धाश्रम और बाल देखभाल केंद्र में एक-एक माह तक सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया।



मामला दो स्टूडेंट्स द्वारा दायर अपील से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने JEE (मेन) 2025 परीक्षा के आयोजन में अनियमितताओं और अपनी प्रतिक्रिया पत्रकों में कथित छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। सिंगल जज ने पहले ही यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि स्टूडेंट्स अपने आरोपों को साबित करने में असफल रहे। हाईकोर्ट ने कहा कि सिंगल जज का आदेश नेशनल साइबर फॉरेंसिक प्रयोगशाला की रिपोर्ट के विस्तृत मूल्यांकन पर आधारित है और उसमें किसी प्रकार की कानूनी खामी नहीं है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हेरफेर जैसे आरोप तथ्यात्मक विवादों से जुड़े होते हैं, जिनका निपटारा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार में नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान स्टूडेंट्स के वकील ने बताया कि वे स्वयं JEE परीक्षाओं 2025 और 2026 में शामिल नहीं होना चाहते। वहीं NTA की ओर से कहा गया कि भले ही स्टूडेंट्स को JEE 2025 और 2026 से वंचित किया गया हो, लेकिन अन्य परीक्षाओं में बैठने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि स्टूडेंट्स हाल ही में कक्षा 12 उत्तीर्ण करने वाले युवा हैं और उनके भविष्य पर स्थायी दुष्प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि JEE से डिबारमेंट को उनके भविष्य के शैक्षणिक जीवन में कलंक के रूप में नहीं देखा जाएगा। अंततः अदालत ने लागत लगाने के बजाय केवल चेतावनी देना उचित समझा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का संदेश देते हुए स्टूडेंट्स को एक माह की सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया

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