यूरोपीय संघ (ईयू) ने ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) को आतंकवादी संगठनों की लिस्ट में शामिल कर दिया है। ब्लॉक की ओर से गुरुवार को बताया गया है कि ईरान में हालिय विरोध प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई के चलते यह कदम उठाया गया है। यूरोपियन यूनियन कमिशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने IRGC को आतंकी संगठन घोषित किए जाने का स्वागत किया है। ईरान में IRGC एक बड़ी सैन्य और राजनीतिक ताकत है। ईयू की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ईरान पर अमेरिका के हमले का खतरा मंडरा रहा है।
ईयू की शीर्ष राजनयिक काया कलास ने कहा, 'यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि तेहरान में प्रदर्शनों के दमन का जवाब दिया जाना जरूरी है। कोई भी शासन जो अपने हजारों लोगों की हत्या करता है, वह पतन की ओर जाता है।अब आईआरजीसी भी अल कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों के बराबर की श्रेणी में आ गया है।'
ईरान पर यूरोप सख्त
इससे पहले यूरोपीय संघ ने तेहरान में प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के जवाब के तौर पर रिवोल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष कमांडर सहित ईरान के 15 अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे। पश्चिम देशों के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ईरान में इस महीने के शुरुआत में विरोध प्रदर्शनों के दौरान 6,300 से अधिक लोग मारे गए हैं। ये कार्रवाई खासतौर से आईआरजीसी के गार्ड ने की।
ईरान में साल 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद IRGC वजूद में आया था। शुरुआत में यह विशेष सैन्य दल था लेकिन हालिया वर्षों में यह देश की बहुत बड़ी ताकत बन गया है। इसकी पकड़ ईरान के सुरक्षा क्षेत्र के साथ-साथ राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र में बेहद गहरी है। IRGC के पास ना सिर्फ अपनी थल सेना, नौसेना और वायु सेना के डिवीजन हैं। बल्कि एक शक्तिशाली खुफिया विंग भी है।IRGC की बढ़ी ताकत
IRGC के पास सेना, नौसेना और वायु सेना के साथ अनुमानित 125,000 सैनिक हैं। ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सत्ता का प्रमुख चेहरा हैं लेकिन हालिया विरोध को दबाने के बाद IRGC और ज्यादा ताकतवर हो गई है। ईरानमें मची उथल-पुथल के बीच माना जा रहा है कि असली सत्ता इस समय खामेनेई नहीं बल्कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ही पास आ गई है।

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