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दुनिया में टनटनाया इंदौरी घंटा The Indore bell rang out across the world.

 दुनिया में टनटनाया इंदौरी घंटा The Indore bell rang out across the world.


                       • रवि उपाध्याय

देश में शायद ही कोई ऐसा बंदा हो जो घंटा से अपरिचित हो। घंटा का परिचय देना सूरज का दीप दिखाने के जैसा है। मंदिर हो या चर्च यह दोनों जगह देखने और सुनने को मिल जाता है। इसे स्कूल से लेकर मंदिर तक देखा जाता था। जब घड़ियां दुर्लभ थीं तब आम आदमी को समय की जानकारी पुलिस थानों, ट्रेज़री में बजने वाले घंटा से मिलती थी। जितना समय होता था उतनी बार घंटा बजाया जाता था। कालांतर में शायद यह नारी सशक्तिकरण या आधुनिकीकरण का असर रहा होगा जो स्कूलों के पीतल कांसे के थाली के आकार के गोल घंटों का स्थान बिजली की घंटियों ने ले लिया। पहले रेल्वे स्टेशनों पर भी रेल के आने की सूचना घंटा बजा कर दी जाती थी। 


यह एक वैज्ञानिक सत्य है कि घंटा से निकलने वाली ध्वनि या नाद से ॐ की सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस ध्वनि से जो नाद निकलती है। वह अत्यंत अलौकिकता का अनुभव कराती है। इतिहास की बात की जाए तो इतिहास में जहांगीर का वह घंटा प्रसिद्ध है जो महल के बाहर लटका रहता था और कोई भी पीड़ित व्यक्ति उसको बजा कर अपनी फरियाद बादशाह तक पहुंचा सकता था। रूस के क्रेमलिन में दुनिया का सबसे बड़ा घंटा बताया जाता है। घंटा समय का मानक भी है। वहीं बोलचाल और लोकभाषा में जब अपने पास कुछ नहीं होता है तो इस शब्द का सामान्य रूप से प्रयोग किया जाता है। यानि इसका उपयोग "जा की रही भावना जैसी, घंटा मूरत बनाई तिन तैसी।


नए साल 2026 के पहले सप्ताह में यह घंटा शब्द चर्चा में तब आया जब इंदौर में हुई दूषित पानी की पूर्ति के बाद जब विभागीय मंत्री घटनास्थल पर हालात की जानकारी लेने पहुंचे। तब मीडिया ने उनसे तल्ख़ अंदाज में सवाल पूछा तो मंत्री ने कहा यार फोकट बात मत करो मीडिया ने इस पर जब तीखा सवाल किया तो मंत्री ने सामान्य बोलचाल की भाषा में घंटा शब्द का उपयोग किया। मीडिया ने इस शब्द का अर्थ अश्लील भाषा के रूप में लिया। दिलचस्प बात यह कि जो न्यूज चैनल घंटा शब्द को अश्लील बता कर मंत्री को कठघरे में खड़ा कर रहे थे वही इसे बार बार दोहरा रहे थे। बार मंत्री का वीडियो प्रसारित कर रहे थे। 


बता दें कि इस शब्द का समानार्थी शब्द "बाबा जी का ठुल्लू" शब्द का उपयोग स्टैंडअप कॉमेडियन कपिल शर्मा अपने शो द कपिल शर्मा शो में उपयोग करते रहे हैं। उसके बाद दोस्तों के बीच भी इस शब्द का उपयोग आमतौर पर हंसी मज़ाक होने लगा है। अब बेचारे मंत्री तो मंत्री ठहरे ठेठ इंदौरी तो उन्होंने लोकल बोली में घंटा बजा दिया। वह यदि कपिल शर्मा द्वारा किए जाने वाले शब्द का उपयोग कर लेते तो शायद मीडिया मेन आऊट नहीं होते। वैसे सामान्यतः माना जाता है कि मीडिया पर्सन और नेताओं के संबंध आमतौर पर मधुर होते हैं। दोनों के व्यावसायिक हित एक दूजे से जुड़े रहते हैं। दोनों के हितों की तुलना सरगम फिल्म में ऋषि कपूर और जया प्रदा द्वारा गाए गाने -तेरे बिन मैं क्या, मेरे बिन तू क्या से दोनों एक दूजे बिन अकेले से की जा सकती है। 


मजेदार यह है कि घंटे वाला यह दोस्ताना संवाद मंत्री और मीडिया के बीच हुआ था लेकिन पेट विपक्ष का पिराने लगा। अब विपक्ष तो ताक में ही बैठा रहता है कि कब छींका टूटे और कब हांडी झेले। बस क्या था वह इंदौरी घंटा लेकर पूरे प्रदेश में जा कर बजाने लगा। विपक्ष के दिमाग की जरा भी घंटी नहीं बजी कि जिस शब्द को वह अश्लील बता कर इस डाल से उस डाल पर कूद रहा है उसे लेकर नेताइनों के साथ चौराहे चौराहे क्यों बज़ा रहा है।

चलो माना कि मीडिया का काम ही नेताओं की घंटी बजाना है पर विपक्ष ने कैसे मान लिया कि घंटा का मतलब अश्लील वाला ही है। इस घंटा आंदोलन का जनता पर तो कोई असर नहीं पड़ा। वो चुप चाप चौराहों पर बैठे नेताओं का देख देख कर मंद मंद हंसती रही की ये लोग क्या पकड़ कर बैठे हैं। मध्यप्रदेश में तो इस स्थिति में 22 साल हो गए और राष्ट्रीय स्तर भी ग्यारह सालों से सत्ता से 9- 2- 11 हैं। अब तो लगता है कि यही नसीब बन कर रह गया है। सबर करें तो आखिर कब तक और कैसे करें। अब यह गुनगुनाने के अलावा क्या करें, कि कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन

( लेखक व्यंग्यकार एवं एक राजनैतिक समीक्षक हैं। )


08012026

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