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शादी से पहले पंडित की जगह वकील से कानूनी सलाह ले रहे दूल्हे, पत्नी के फ्यूचर केस का सता रहा डरGrooms are seeking legal advice from lawyers instead of priests before marriage, fearing future legal cases from their wives


शादी से पहले पंडित के पास जाकर कुंडली मिलान, शुभ मुहूर्त और फिर गहनों, कपड़ों व दावतों के खर्चों पर चर्चा करना हमेशा से आम परंपरा रही है। अब इंदौर जैसे आधुनिक शहरों में इस परंपरा में एक नया और चौंकाने वाला अध्याय जुड़ गया है। पंडित से पहले वकील से सलाह ली जा रही है। यह बदलाव उस डर और अविश्वास को दर्शाता है, जो आधुनिक रिश्तों में तेजी से बढ़ रहा है।


आज के युवाओं, खासकर होने वाले दूल्हों और उनके परिवारों में यह आशंका घर कर गई है कि अगर भविष्य में रिश्ता नहीं चला, तो उन पर दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और भरण-पोषण जैसे गंभीर कानूनी मामले दर्ज हो सकते हैं। इसी चिंता के चलते अब शादी की तैयारियों में ‘लीगल कंसलटेशन’ एक जरूरी हिस्सा बनता जा रहा है।

क्यों बदल रहा है यह ट्रेंड?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार पहले लोग तब सलाह लेने आते थे, जब शादी टूटने की कगार पर होती थी। अब स्थिति उलट गई है। युवा पीढ़ी कानून के प्रति पहले से कहीं अधिक जागरूक है। वे शादी को केवल भावनात्मक रिश्ता नहीं, बल्कि एक कानूनी समझौता भी मानने लगे हैं। वे पहले ही यह जान लेना चाहते हैं कि पति-पत्नी के अधिकार क्या हैं, किन परिस्थितियों में किन धाराओं में केस बन सकता है और उससे बचाव कैसे किया जा सकता है।

इसे एक तरह का 'लीगल सेफ्टी प्लान' कहा जा सकता है, जिसे परिवार शादी से पहले ही तैयार कर लेना चाहता है, जिससे भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में खुद को सुरक्षित रखा जा सके।

498A और घरेलू हिंसा कानून का डर

इस ट्रेंड के केंद्र में दहेज प्रताड़ना से जुड़े कानून, खासकर धारा 498A (अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 85) का डर है। यह कानून महिलाओं को दहेज के लिए होने वाली प्रताड़ना से बचाने के लिए बनाया गया है और इसका उद्देश्य पूरी तरह सही है। लेकिन इसके दुरुपयोग की चर्चाओं ने कई परिवारों में चिंता बढ़ा दी है।

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