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साल पहले शुरू हुई थी चर्चा, अब होने जा रहा फैसला... भारत-ईयू व्यापार समझौते पर लगेगी मुहरThe discussions began 19 years ago, and now a decision is finally going to be made... The India-EU trade agreement is set to be finalized.


भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों में 27 जनवरी 2026 को होने वाला भारत-ईयू शिखर सम्मेलन एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।


इस सम्मेलन में महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की वार्ताओं के समापन की घोषणा, एक रणनीतिक रक्षा समझौते (सुरक्षा व रक्षा साझेदारी) का अंतिम रूप और भारतीय श्रमिकों की यूरोप में रोजगार के अवसर देने संबंध एक फ्रेमवर्क समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

गणतंत्र दिवस समारोह में लिया हिस्सा

वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल, खासकर अमेरिकी व्यापार और सुरक्षा नीतियों के प्रभाव को देखते हुए भारत व यूरोपीय संघ की तरफ से एक व्यापक दृष्टिकोण की मंशा जताये जाने की संभावना है, जिसको लेकर पूरी दुनिया में काफी उत्सुकता है। भारत और ईयू के बीच होने वाले रक्षा समझौते की घोषणा स्वयं ईयू प्रेसिडेंट उर्सूला ने सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लेने के बाद किया।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि, “भारत के गणतंत्र दिवस पर ईयू, ईयू मिलिट्री स्टाफ, तथा हमारी समुद्री मिशनों 'अटलांटा' व 'एसपाइड्स' के झंडों का प्रदर्शन हमारे गहन होते सुरक्षा सहयोग का एक शक्तिशाली प्रतीक है। यह कल हमारे सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर के साथ समाप्त होगा।''

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का एट होम

सोमवार देर शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की तरफ से दिए गए 'एट होम' में शामिल होने के बाद ईयू प्रेसिडेंट ने फिर एक संदेश लिखा कि, “स्नेहपूर्ण स्वागत के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद। भारत और यूरोपीय संघ दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं जो नये वैश्विक व्यवस्था को आकार देने के लिए साथ काम कर रहे हैं। हम अपनी साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए यहां हैं।''

शिखर सम्मेलन में भारतीय पक्ष की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए), विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, रेलवे व संचार मंत्री सहित कुछ वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी हिस्सा लेंगे। यूरोपीय पक्ष से यूरोपीय संघ की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य प्रतिनिधि होंगे।

मंगलवार को होगी बैठक

सोमवार को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ पर राजकीय अतिथि के रूप में शिरकत की, जहां उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और भारत की सैन्य शक्ति व सांस्कृतिक विविधता का प्रत्यक्ष अनुभव किया। ईयू प्रेसिडेंट उर्सुला के साथ उनके कैबिनेट के वरिष्ठतम सहयोगी भी भारत दौरे पर हैं जो मंगलवार को होने वाली बैठक में हिस्सा लेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “भारत को यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को हमारे गणतंत्र दिवस समारोह में मेजबानी करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उनकी उपस्थिति भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी की बढ़ती ताकत और साझा मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।''

2007 में शुरू हुई थी वार्ता

उन्होंने कहा कि यूरोपीय नेताओं की यह यात्रा विविध क्षेत्रों में भारत और यूरोप के बीच गहन जुड़ाव और सहयोग को नई गति प्रदान करेगी। वॉन डेर लेयेन ने सोमवार को कहा, “भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में प्रमुख अतिथि के तौर पर शामिल होना जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है। और हम सभी इससे लाभान्वित होते हैं।''

भारत व ईयू के बीच कारोबारी समझौते को लेकर वार्ता वर्ष 2007 में शुरू हुई थी लेकिन कई मुद्दों पर भारी मतभेद को देखते हुए वर्ष 2013 में इसे स्थगित कर दिया गया था। जून 2022 में इन्हें फिर से शुरू किया गया और सिर्फ साढ़े तीन वर्षों में वार्ता तकरीबन पूरी हो चुकी है। अब इस समझौते से व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन में गहरा बदलाव आने की संभावना है।

रक्षा क्षेत्र में गहन सहयोग पर सहमति

शिखर सम्मेलन का फोकस व्यापार के अलावा रक्षा एवं सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, दुर्लभ प्रौद्योगिकियों और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने पर होगा। प्रस्तावित सुरक्षा व रक्षा साझेदारी से दोनों पक्षों के बीच रक्षा क्षेत्र में गहन सहयोग, अंतर-संचालन क्षमता और भारतीय कंपनियों के लिए ईयू में विस्तार करने के के रास्ते खुलेंगे। इसके अलावा सूचना सुरक्षा समझौते (एसओआईए) की वार्ताएं शुरू होंगी, जो औद्योगिक रक्षा सहयोग को बढ़ावा देगी।

भारतीय श्रमिकों की यूरोप में रोजगार के अवसर देने संबंधी एक समझौता करने की भी तैयारी है। भारत पहले ही ईयू के कुछ प्रमुख देशों जैसे फ्रांस, जर्मनी और इटली के साथ इस तरह का समझौता कर चुका है। अब ईयू के साथ समझौता होने से भारतीय प्रोफेशनल व प्रशिक्षित श्रमिकों के लिए वहां ज्यादा व्यापक अवसर मिलने की संभावना है।

इससे भारत से यूरोपीय देशों में गैरकानूनी तरीके से होने वाली घुसपैठ पर भी लगाम लगेगा। वैसे रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के नजरिए में अंतर है लेकिन वे स्थिर अंतरराष्ट्रीय माहौल व नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के साझा पैरोकार हैं। हिंद प्रशांत क्षेत्र में भी दोनों पक्षों की एक समान सोच है।

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