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इंदौर हादसे के बाद भी लापरवाही, बिना हैवी मेटल जांच के निगम ने ‘सुरक्षित’ बताया पानी Despite the Indore tragedy, negligence continues; the corporation declared the water 'safe' without conducting heavy metal testing

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भोपाल। इंदौर में दूषित पानी के सेवन से हुई 17 मौतों के बाद भी प्रशासन की नींद टूटती नजर नहीं आ रही है। नगर निगम की प्रयोगशालाओं से जो रिपोर्ट सामने आ रही हैं, उन्हें विशेषज्ञ 'आंकड़ों की बाजीगरी' और जनता के साथ धोखा करार दे रहे हैं।

हकीकत यह है कि शहर सरकार जिस पानी को 'अमृत' बताकर पिला रही है, उसकी जांच सरकारी मानकों (BIS 2012) पर ही खरी नहीं उतर रही है। तीन घंटे की जांच बनाम पांच दिन की हकीकतनगर निगम का मैदानी अमला पानी के नमूनों की केवल सतही जांच कर रहा है। इसमें गंध, रंग, स्वाद, पीएच (pH) और क्लोरीन की मात्रा जांची जा रही है, जो महज 3 घंटे की प्रक्रिया है।

, पर्यावरणविदों का कहना है कि पानी में मौजूद घातक रसायनों, सूक्ष्म बैक्टीरिया और भारी धातुओं (Heavy Metals) का पता लगाने के लिए 3 से 5 दिन का समय लगता है, जिसकी अनदेखी की जा रही है।क्या छिपाया जा रहा है? (हकीकत बनाम दावा)विशेषज्ञों और रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चला है कि निगम की जांच रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदु नदारद हैं।

मानक (Parameter)निगम का दावावास्तविकतास्वाद और रंगसब ठीक हैयह केवल सतही मानक है। बैक्टीरियाशून्य (0)कोलीफार्म का शून्य होना वैज्ञानिक रूप से संदिग्ध है। लेड व आर्सेनिकजानकारी नहींइनकी कोई जांच ही नहीं की गई। BOD/CODरिपोर्ट से गायबरासायनिक प्रदूषण मापने का कोई पैमाना नहीं।

जल स्रोतस्पष्ट नहींस्रोत (नर्मदा या बोरिंग) की जानकारी रिपोर्ट में नहीं है। निगम की रिपोर्ट पूरी तरह गोलमाल है। रिपोर्ट में कोलीफार्म बैक्टीरिया को शून्य दिखाया गया है, जो पाइपलाइन के पानी में संभव नहीं है। बिना स्रोत की जानकारी के इस रिपोर्ट का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।- डॉ. सुभाष पांडेय, पर्यावरणविद

जीवन से खिलवाड़

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार, सुरक्षित पेयजल के लिए कुछ रसायनों की सीमा तय है, जिनका परीक्षण रिपोर्ट में नहीं मिला: आर्सेनिक व लेड: इनकी सीमा 0.01 mg/L होनी चाहिए, लेकिन इनकी जांच ही नहीं हो रही। फ्लोराइड व नाइट्रेट: हड्डियों और पेट की बीमारियों के लिए जिम्मेदार इन तत्वों पर चुप्पी साधी गई है। माइक्रोप्लास्टिक: आधुनिक खतरों जैसे कीटनाशकों और माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति का कोई जिक्र नहीं है।

आयुक्त का पक्षइस मामले पर नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन का कहना है कि हम फिलहाल पानी का स्टैंडर्ड पोर्टेबिलिटी टेस्ट करवा रहे हैं। अभी हैवी मेटल (भारी धातुओं) के टेस्ट की जरूरत महसूस नहीं हो रही है। पोर्टेबिलिटी टेस्ट में सभी जरूरी जांचें शामिल हैं। 'BIS 2012: क्या हैं शुद्ध पानी के मानक?शुद्ध पेयजल के लिए इन मापदंडों का पालन अनिवार्य है। टीडीएस (TDS): 500 - 2000 mg/Lनाइट्रेट: 45 mg/Lफ्लोराइड: 1.0 mg/Lक्लोरीन: 0.2 mg/Lकोलीफार्म बैक्टीरिया: 0 (प्रति 100 ML सैंपल)

जब तक नगर निगम अपनी जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और आधुनिक मानकों को शामिल नहीं करता, तब तक 'हर घूँट' के स्वस्थ होने का दावा केवल कागजी ही रहेगा।

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