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BMC चुनाव परिणाम: हारकर भी निराश नहीं उद्धव ठाकरे, कहां दिख रही उम्मीद की किरण?BMC election results: Uddhav Thackeray not disheartened despite the defeat, where is the ray of hope visible?

 

बीएमसी चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने परिणामों को लोकतांत्रिक भावना के साथ स्वीकार करते हुए भविष्य के लिए उम्मीद का संदेश दिया है. चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी को केवल मराठी मतदाताओं ही नहीं, बल्कि समाज के अन्य वर्गों और उत्तर भारतीय समुदाय से भी समर्थन मिला है, जो उनके लिए एक सकारात्मक संकेत है.


मेयर पद को लेकर उद्धव ने कही ये बात

उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘हम मुंबई में अपना महापौर चाहते थे और आज भी चाहते हैं. हम आज तक वह लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए है. हालांकि, घोषित परिणामों ने सत्ताधारी पार्टी को परेशान कर दिया है. अगर ईश्वर की इच्छा होगी तो महापौर अवश्य मिलेगा.’

उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता ने जो मैंडेट दिया है, उसे पार्टी पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करती है और इसके लिए सभी मतदाताओं का आभार व्यक्त करती है.

16 जनवरी को घोषित हुए नतीजों में बृहन्मुंबई महानगरपालिका सहित महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव परिणाम सामने आए. बीएमसी में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन ने 227 में से 118 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया. सत्ता के लिए आवश्यक 114 के आंकड़े को पार करते हुए इस गठबंधन ने बीएमसी पर दावा मजबूत कर लिया.

बीएमसी चुनाव में महायुति की जीत

बीजेपी ने ठाकरे परिवार के पारंपरिक गढ़ में सेंध लगाते हुए 89 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं. दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और एनसीपी (शरद पवार गुट) के गठबंधन को कुल 72 सीटों से संतोष करना पड़ा. इसमें शिवसेना (यूबीटी) की 65, मनसे की 6 और एनसीपी (एसपी) की 1 सीट शामिल है.

अन्य दलों में कांग्रेस ने 24 सीटें जीतीं, जबकि एआईएमआईएम को 8 सीटों पर सफलता मिली. एनसीपी (अजित पवार गुट) ने 3, समाजवादी पार्टी ने 2 और 2 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भले ही सत्ता का गणित शिवसेना (यूबीटी) के पक्ष में न हो, लेकिन विभिन्न समुदायों से मिला समर्थन पार्टी के लिए भविष्य की राजनीति में एक मजबूत आधार बन सकता है. उद्धव ठाकरे का यह रूख संकेत देता है कि वे इस हार को अंत नहीं, बल्कि नए सिरे से संघर्ष और संगठन को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं.

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