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कुपोषण से मर जाती बीजेपी… उद्धव ठाकरे ने क्यों कहा-हमारी थाली का बचा खाना खा रहे BJP is dying of malnutrition... Why did Uddhav Thackeray say they are eating the leftover food from our plates?

महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव से पहले सियासी पारा हाई है. वोटिंग के लिए अब महज 4 दिनों का ही समय बचा हुआ है. ऐसे में तमाम राजनीतिक दलों की तरफ से तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है. इसी कड़ी शिवसेना उद्धव गुट के चीफ उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि अगर बाल ठाकरे ने बीजेपी को खाना नहीं खिलाया होतो वो वह कुपोषण के कारण ही मर जाती.उनका यह बयान बीजेपी नेता रावसाहेब दानवे के बयान का पलटवार माना जा रहा है।



BJP नेता रावसाहेब दानवे ने पहले कहा था कि “हर राजनीतिक पार्टी ने हमारी थाली से खाया है”, जिसका मतलब था कि सभी राजनीतिक पार्टियों को किसी न किसी समय BJP से मदद मिली है.

क्या बोले उद्धव ठाकरे?

बीजेपी नेता रावसाहेब के बयान पर पलटवार करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर शिवसेना प्रमुख (बाल ठाकरे) ने तुम्हें खाना नहीं खिलाया होता, तो तुम कुपोषण से मर जाते. अगर ऐसा है, तो तुम हमारी थाली का बचा हुआ खाना क्यों खा रहे हो? तुम और कितना खाओगे? ऐसा लगता है कि तुम्हें ‘भस्म्या’ (कभी न खत्म होने वाली भूख) की बीमारी हो गई है. तुम हमारे कितने लोगों को ले जाओगे?

गौरतलब है कि BJP पहली बार 1990 के दशक में अविभाजित शिवसेना के साथ गठबंधन में महाराष्ट्र में सत्ता में आई थी, जब दिवंगत बाल ठाकरे पार्टी के प्रमुख थे.

यूपीआई के जरिए बांटे जा रहे पैसे

उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि बीएमसी चुनाव मे यूपीआई के जरिए पैसे बांटे जा रहे हैं. इसके साथ ही इनकी यह भी पूरी कोशिश है कि विपक्ष का कोई भी उम्मीदवार मैदान में ही न बचे. ठाकरे ने आगे कहा कि अगर पुलिस जागी हुई है तो उसे इस मामले को गंभीरता से देखना चाहिए.

हमारे पास बहुत से नए लोग- उद्धव

उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर भी हमला बोला है. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह छीन लिया गया. लेकिन, लोग उनके साथ हैं. उन्होंने कहा, “अब हम एक नई शुरुआत करेंगे, जैसा हमने 1988 में किया था. अब हमारे पास बहुत सारे नए चेहरे हैं. ठाकरे ने कहा कि छत्रपति संभाजी नगर को साल में सिर्फ 44 दिन पानी मिलता है. जब वह मुख्यमंत्री थे, तो राज्य सरकार ने शहर के लिए पानी की पाइपलाइन योजना को पूरी तरह से फंड देने का प्रस्ताव दिया था. उन्होंने दावा किया, “लेकिन इस सरकार ने शहर को इस प्रोजेक्ट के लिए लोन लेने पर मजबूर किया और फिर भी यह अधूरा है.”

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