भारत की विदेश नीति के लिए यह बड़ा साबित होने वाला है। इसकी शुरुआत गणतंत्र दिवस से हो रही है, जिसमें भारत-यूरोपियन यूनियन शिखर सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्षों के साथ होने वाली बैठकें भी शामिल हैं। मु्क्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीदों के चलते भारत-यूरोपियन यूनियन शिखर सम्मेलन की अहमियत बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। इसके तुरंत बाद फरवरी में ही एआई इम्पैक्ट समिट भी होना है। भारत इसी साल आगे चलकर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS summit) की भी मेजबानी करने जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इसी साल दिल्ली में भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन का भी आयोजन हो सकता है। ये सभी बैठकें और सम्मेलन जियो-पॉलिटिक्स में बहुत बड़े बदलाव का रास्ता साफ कर सकते हैं।
जियो-पॉलिटिक्स के लिए अहम साल
भारत-यूरोपियन यूनियन शिखर सम्मेलन गणतंत्र दिवस के दौरान ही दिल्ली में होगा, जिसके लिए इन देशों के नेताओं को गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर बुलाया गया है। एक्सपर्ट का कहना है कि एआई समिट ग्लोबल साउथ के लिए भारत को अपना एजेंडा सेट करने का मौका दे सकता है। क्योंकि, इसकी अगुवाई करने पर चीन और पश्चिम के कुछ देशों की भी नजरें लगी हुई हैं। एआई समिट में ब्राजील के राष्ट्रपति और कनाडा के प्रधानमंत्री भी शामिल होने वाले हैं। इनके अलावा फ्रांस के राष्ट्रपति भी भाग ले सकते हैं।
चीन पर भारी पड़ने की भारतीय रणनीति
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आ सकते हैं। वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी इसमें भाग लेने की संभावना है। इससे पहले 2019 में जिनपिंग भारत आए थे। ईटी को मिली जानकारी के अनुसार ब्रिक्स समिट में भारत बहुपक्षीय संस्थानों में सुधारों पर जोर देगा और ग्लोबल साउथ के लिए एक समावेशी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा।
डोनाल्ड ट्रंप के भी भारत आने की संभावना
भारत इस साल क्वाड शिखर सम्मेलन भी आयोजित करने की सोच रहा है, जो 2025 में नहीं हो पाया। अगर इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आ जाते हैं, तो मौजूदा जियो-पॉलिटिक्स के लिए यह एक बहुत अहम बदलाव साबित हो सकता है। भारत और अमेरिका अभी तक अपने ट्रेड डील को पूरी तरह से फाइनल नहीं कर पाए हैं और हो सकता है कि क्वाड से पहले इसका भी कोई सकारात्मक रास्ता निकल पाए। खास बात ये है कि इसी साल बाद में अमेरिका जी20 शिखर सम्मेलन की भी मेजबानी करने वाला है।विदेश नीति में भारत के लिए व्यस्त साल
जहां तक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलनों की बात है तो भारत जहां जापान के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा, वहीं रूस, भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। शिखर सम्मेलन के लिए जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री भारत आ सकती हैं, जिसमें उनका फोकस भारत में निवेश बढ़ाने और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी में भागीदारी पर जोर देने की रहेगी। इसके अलावा नॉर्वे में इंडिया नॉर्डिक समिट की भी योजना है, जिसमें आर्थिक भागीदारी पर सबसे ज्यादा फोकस रह सकता है। 2026 में जिन वैश्विक नेताओं के भारत आने की संभावना है, उनमें जर्मन चांसलर और इजरायली प्रधानमंत्री भी नाम शामिल हैं।

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