वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाली घोषणा की है। ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर एक 'फ्यूचर डील का फ्रेमवर्क' तैयार कर लिया है। इस समझौते के बाद ट्रंप ने डेनमार्क, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी जैसे सभी यूरोपीय देशों पर 1 फरवरी से लगने वाले भारी भरकम टैरिफ को भी टालने का फैसला किया है, जो इस द्वीप को लेकर अमेरिका का विरोध कर रहे थे।
Concept of a Deal': क्या है इस समझौते में?
ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रुट के साथ मुलाकात के बाद इस समझौते का खुलासा किया। हालांकि इसके विवरण अभी भी साफ हैं, लेकिन सूत्रों और ट्रंप के बयानों से 3 बड़ी बातें सामने आ रही हैं
साइप्रस मॉडल' पर चर्चा: रिपोर्ट्स के अनुसार, यह समझौता ब्रिटेन और साइप्रस के बीच के सैन्य आधार मॉडल जैसा हो सकता है। यानी ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा रहेगा, लेकिन अमेरिका वहां के कुछ सैन्य और संसाधन क्षेत्रों पर पूर्ण प्रभुत्व पा सकता है।
खनिज और सुरक्षा: ट्रंप ने इसे 'अल्टीमेट लॉन्ग-टर्म डील' बताया है। अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ग्रीनलैंड के विशाल रेयर अर्थ मेटल्स और वहां गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम लगाना है।
बल प्रयोग से इनकार: ट्रंप ने पहली बार स्पष्ट तौर पर कहा, 'मैं ग्रीनलैंड के लिए बल प्रयोग नहीं करना चाहता और न ही करूंगा, हालांकि अमेरिका अजेय है।'
यूरोप को बड़ी राहत
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच तनाव इतना बढ़ गया था कि ट्रंप ने डेनमार्क सहित 8 नाटो देशों पर 10% से 25% तक टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी थी। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'इस बातचीत के आधार पर, मैं उन टैरिफ को लागू नहीं करूंगा जो 1 फरवरी से प्रभावी होने वाले थे।' इस खबर के आते ही वैश्विक बाजारों और वॉल स्ट्रीट में जबरदस्त तेजी देखी गई, क्योंकि ट्रेड वॉर का खतरा फिलहाल टल गया है।
'सब मिल गया जो हम चाहते थे'
जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या अमेरिका को ग्रीनलैंड पर मालिकाना हक मिलेगा, तो उन्होंने सीधा जवाब देने के बजाय कहा, 'यह एक ऐसा सौदा है जिसे लोग तुरंत लपक लेंगे। यह अमेरिका के लिए शानदार है, हमें वह सब मिल रहा है जो हम चाहते थे।' उन्होंने इस डील को 'हमेशा के लिए' चलने वाला करार दिया।
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि टैरिफ का हटना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि 'डेनमार्क की संप्रभुता' के साथ कोई समझौता नहीं होगा और ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।

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