राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक में दूसरे दिन सोमवार को संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत फिर हिंदुओं के बिखराव को लेकर बेहद चिंतित दिखे। कहा कि हिंदू संगठित हों, इसके लिए मुहल्ला हिंदू बैठक बहुत जरूरी है।
मोहल्ला बैठक में उन्होंने संगठित होने के फायदे और बिखराव के नुकसान बताएं। उन्होंने अब तक हुई मुहल्ला हिंदू बैठक की समीक्षा की। कहा कि कई राज्यों में हिंदुओं का पलायन हो रहा है, इसे रोकने को गंभीर कदम उठाना जरूरी है। पलायन तभी रुकेगा, जब हिंदू जागृत होगा और इसमें मुहल्ला हिंदू बैठक की भूमिका प्रमुख होगी।
संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक
अपने सात दिवसीय प्रवास के दौरान रविवार को वृंदावन के केशवधाम पहुंचे संघ प्रमुख ने रविवार शाम शीर्ष पदाधिकारियों के साथ परिचयात्मक बैठक ली थी। सोमवार को विधिवत बैठक शुरू हुई। तीन सत्रों में हुई बैठकों में पहली बैठक सुबह दस बजे से शुरू हुई। संघ प्रमुख ने सबसे बड़ी चिंता हिंदुओं के बिखराव पर व्यक्त की। कहा कि हिंदू कोई जाति नहीं, यह विभिन्न समाजों की एक जैसी मनोवृत्ति और स्वभाव है। हिंदू इसलिए कहा गया क्योंकि हम सभी पंथों और संप्रदायों को मानते हैं। हिंदू कहने से ही हम एक सूत्र में बंधते हैं।
हिंदुओं में जातिवाद पर चिंतित संघ प्रमुख बोले, मोहल्ला हिंदू बैठक बहुत जरूरी
संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदू सम्मेलन और मोहल्ला हिंदू बैठकें हिंदुओं को संगठित करने में सबसे अधिक सहायक होंगी। हर हिंदू परिवार इससे जुड़ेगा और उसके अंदर खुद समाज को एकजुट करने की भावना जागृत होगी। इसी सत्र में उन्होंने पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और उनके पलायन पर भी चिंता व्यक्त की।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि यह भी इसलिए हो रहा है कि हम अपनी ताकत नहीं पहचान रहे हैं। जब हिंदू एक नहीं बल्कि जातियों में बंट रहे हैं। स्वयंसेवकों को और मेहनत करनी होगी। हर हिंदू में पहले राष्ट्र और समाज का भाव जागृत करना होगा, हिंदुओं में जातिवाद का भाव खत्म करने की पूरी ताकत लगानी होगी। पड़ोसी देशों में भी हो रही हिंसा पर शीर्ष पदाधिकारियों से मंथन किया।
राज्यों में हिंदुओं पर अत्याचार व पलायन, जागरूक न होना का नतीजा
मोहन भागवत ने कहा कि जो भी हो रहा है, वह भविष्य के लिए किसी भी देश के लिए ठीक नहीं है। दो अन्य सत्रों में उन्होंने शताब्दी वर्ष समारोह पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ के पंच परिवर्तन पर काम और तेज हो। सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की।
बैठक में संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह सर कार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, अरुणजी, मुकुुंदजी, रामदत्त चक्रधर, अतुल लिमये, संपर्क प्रमुख रामलाल, प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर समेत 45 पदाधिकारी मौजूद रहे।
कार्यकारिणी की बैठक सात जनवरी तक चलेगी। आठ व नौ जनवरी को संघ के अनुषांगिक संगठन जो देश-विदेश में अपने प्रकल्प संचालित कर रहे हैं, उनके प्रमुख व संगठन महामंत्रियों के साथ दो दिवसीय बैठक में विभिन्न प्रकल्पों की प्रगति व आगामी योजनाओं पर मंथन होगा।

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