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बीजापुर के गंगालूर में रचा गया इतिहास: 35 गांवों के ग्रामीणों और 200 सरेंडर नक्सलियों ने एक साथ फहराया तिरंगाHistory was made in Gangalur, Bijapur: Villagers from 35 villages and 200 surrendered Naxalites together hoisted the tricolor flag.

 

थाना गंगालूर क्षेत्र जो 25-30 वर्षों के लंबे समय तक देश के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है। इन क्षेत्रों के सैकड़ों ग्रामीणों व आत्मसमर्पण माओवादियों के उपस्थिति में गणतंत्र दिवस समारोह ऐतिहासिक, अभूतपूर्व एवं जनभागीदारी से संपन्न हुआ। यह पहली बार है कि अति संवेदनशील क्षेत्र में बड़े स्तर पर ग्रामीणों की उपस्थिति के साथ राष्ट्रीय पर्व का आयोजन किया गया।


यह कार्यक्रम एसपी जितेंद्र यादव बीजापुर के निर्देशन, डीएसपी विनीत साहू के मार्गदर्शन में तथा गिरीश तिवारी थाना प्रभारी, गंगालूर के नेतृत्व में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस अवसर पर 35 गांवों के लगभग 1000 ग्रामीण व आत्मसमर्पित माओवादियों ने भाग लिया, जिनमें हार्डकोर नक्सल कैडर से जुड़े परिवारों सहित सुदूर एवं पूर्व में माओवाद से प्रभावित गांव पीड़िया, तामोड़ी, गमपुर, अण्ड्री, डोडीतुमनार, पुसनार, कावड़गांव, हिरोली, हिरमागुंडा गांव के ग्रामीण शामिल थे।

पीड़िया सरपंच सन्नू अवलम,भूतपूर्व सरपंच कलमू राजू, गंगालूर सरपंच पायल हेमला, तोड़का सरपंच सरोजना ताती, गोंगला सरपंच संगीता एक्का, कमकानार सरपंच राजमनी ओयाम एवं ग्राम डोडी तुमनार से सोना राम बारसे, मर्रीवाड़ा से सोढ़ी माड़वी आदि लोगों ने ग्रामीणों के समक्ष अपना उदबोधन दिया। एसपी जितेन्द्र यादव के नेतृत्व में चलाये जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान में लोगों के आत्मसर्मपण के प्रयास की सराहना करते हुए थाना क्षेत्र के लोगों से समाज की मुख्य धारा में जुड़ने की अपील की।

विभिन्न जन प्रतिनिधियों ने अपनी उद्बोधन की शुरूआत हिन्दी भाषा से करते हुए गोंण्डी में अनुवाद कर ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि के रूप में शहीद परिवार से रूकमणी हेमला, रामीन हेमला को श्रीफल एवं मिष्ठान देते हुए सम्मानित किया गया। जिन क्षेत्रों में कभी तिरंगा फहराना असंभव माना जाता था। ग्रामीणों ने निर्भीक होकर संविधान और ध्वज के सम्मान में गणतंत्र दिवस मनाया।

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