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चर्चित भदरसा दुष्कर्म कांड में आरोपित राजू खान को 20 साल का कठोर कारावास, भरना होगा 50 हजार का हर्जानाIn the infamous Bhadarsa rape case, the accused, Raju Khan, has been sentenced to 20 years of rigorous imprisonment and ordered to pay a fine of 50,000 rupees.

 

भदरसा के नाबालिग से दुष्कर्म प्रकरण में विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट प्रथम ने गुरुवार को दोषी राजू खान (21 वर्ष) को धारा 5जी (जे)(ii) 1/6 पाक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई तथा 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। न्यायालय के आदेशानुसार दुष्कर्म एवं पाक्सो की सजा को समायोजित कर दिया गया है।


अर्थदंड की संपूर्ण धनराशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। सजा सुनाए जाने के बाद दुष्कर्मी राजू खान को गुरुवार को कड़ी सुरक्षा में जिला कारागार वापस भेज दिया गया। न्यायालय ने सह आरोपित व सपा नेता मोईद अहमद को बुधवार को दोषमुक्त कर दिया था। इसी के साथ ही उसकी रिहाई का आदेश जेल भेज दिया गया है, लेकिन इसी मामले से जुड़े गिरोहबंदी के अपराध में जमानत न मिल पाने से उसकी रिहाई नहीं हो सकेगी।

हालांकि, न्यायालय से दोषमुक्त किए जाने के बाद उसकी जमानत अर्जी स्वीकार किए जाने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। इस मामले में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी न्यायालय में जुटे रहे। शासकीय अधिवक्ताओं के अनुसार 29 जुलाई, 2024 को पूराकलंदर थाने में पीड़िता की मां ने सपा नेता मोईद अहमद व राजू खान के विरुद्ध मोईद की बेकरी में ले जाकर दुष्कर्म समेत कई आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

किशोरी की तबीयत खराब होने पर उसकी मां ने पूछताछ की, तब पूरी घटना उजागर हुई। जांच में किशोरी के गर्भ में 12 सप्ताह का भ्रूण पाया गया था, जिसका न्यायालय के आदेश पर गर्भपात कराया गया था। दोनों पर 10 अक्टूबर, 2024 को ही न्यायालय ने आरोप तय कर दिया था। भदरसा दुष्कर्म प्रकरण में न्यायालय के निर्णय पर अभियोजन पक्ष ने अप्रसन्नता जताई है।

इस मुकदमे की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक विनोद उपाध्याय ने बताया कि न्यायालय के दोनों आदेशों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील दायर की जाएगी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सईद खान व अवधेश यादव ने बताया कि वादिनी ने प्राथमिकी में घटना के दौरान वीडियो बनाए जाने का आरोप लगाया था, जोकि विवेचना के दौरान पुलिस ऐसे किसी वीडियो की जानकारी नहीं जुटा सकी। वहीं विवेचक ने आरोपित व पीड़िता की आपस में बातचीत व काल डिटेल का विवरण भी साक्ष्य के रूप में जुटा सकने में नाकाम रही। मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता ने दो बार अलग-अलग बयान दर्ज कराए।

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