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चीन को पछाड़ कर भारत कैसे बना चावल उत्पादन में नंबर-1? दुनिया का 28% धान हमारे किसानों ने उगाया How did India surpass China to become the number one rice producer? Our farmers cultivated 28% of the world's rice.

भारत ने चावल उत्पादन में चीन की बादशाहत को खत्म कर दिया है. 15 करोड़ टन राइस का प्रोडक्शन कर इंडिया विश्व में नंबर वन हो गया है. यह दुनिया में कुल उगाए गए चावल का 28% है. देश में साल 2020 से लेकर अब तक हर साल चावल की पैदावार में बढ़ोतरी हुई है.



हाल ही में अमेरिका के कृषि विभाग (United States Department of Agriculture) ने इसे लेकर रिपोर्ट भी जारी की है. चावल की खेती के लिए अनुकूल मौसम, फसल उगाने के लिए बड़ा एरिया और सरकारी सहयोग की वजह से भारत को यह मुकाम मिला.

राज्यों की बात करें तो साल 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना में सबसे अधिक चावल का उत्पादन हुआ है. भारत में धान की 12 से अधिक प्रजातियां उगाई जाती हैं. कई देशों में यहां से चावल भेजे जाते हैं.

चीन को पीछे करने की वजह क्या रही, भारत से कितने देशों को चावल भेजा जाता है, विश्व के अन्य किन देशों में चावल का उत्पादन होता है. इस रिपोर्ट में इन सभी सवालों के जवाब जानेंगे.

चावल उत्पादन और एक्सपोर्ट में चीन से कैसे बेहतर बना भारत? : भारत के साथ चीन में भी धान की खेती होती है. भारत में इसके लिए बड़ा एरिया है. यहां से सबसे ज्यादा चावल दूसरे देशों को भेजे जाते हैं. खासकर बासमती और नॉन-बासमती वैरायटी में देश का दबदबा है. आगे 7 प्वाइंट में इसे विस्तार से समझेंगे.

1-जलवायु विविधता और व्यापार नीति : देश में अलग-अलग तरह के फसलों (खरीफ और रबी) की खेती की जाती है. मौजूदा समय में चीन भी ज्यादा चावल पैदा करता है लेकिन भारत की कृषि जलवायु विविधता और व्यापार नीति इसे बेहतरीन बनाती है. इसी वजह से भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल एक्सपोर्टर बन गया.

2-ज्यादा पैदावार वाली बीज की किस्में : भारत में धान की फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिक लगातार रिसर्च करते रहते हैं. एक के बाद एक अच्छी वैरायटी के बीज उपलब्ध कराए जाते हैं. एग्रीकल्चरल रिसर्च संस्थानों खासकर ICAR ने 184 नई फसलों की किस्में जारी कीं. इनमें 122 तरह के अनाज हैं. बेहतर बीजों से पैदावार बढ़ाने में मदद मिली.

3-खेती के इलाके का विस्तार : चावल उत्पादन को बढ़ाने के लिए भारत ने अलग-अलग राज्यों में इसकी खेती को बढ़ावा दिया. किसानों को जागरूक किया. इनमें 2 तरह के इलाके शामिल किए गए. पहला वह जहां की खेती बारिश पर निर्भर है. दूसरा वह जहां ट्यूबवेल आदि के जरिए फसलों की सिंचाई करनी पड़ती है. वहीं चीन का खेती का इलाका एक जैसा ही रहा.

4-सरकारी मदद से मिली राहत : सरकार किसानों की आमदनी और फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करती रही है. इसके लिए कई योजनाएं भी चलाई जा रहीं हैं. खाद्य सुरक्षा और बीज वितरण को बढ़ाने वाली योजना लाई गई. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने चावल को एक स्ट्रेटेजिक फसल (खाद्य सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, औद्योगिक जरूरतों के लिए अहम फसलें) के तौर पर बढ़ावा दिया.

5-एक्सपोर्ट डिमांड : दुनिया में चावल निर्यात के लिहाज से भारत की अहम भूमिका है. इसकी वजह से चावल के ज्यादा उत्पादन को बढ़ावा मिला. भारत अब विदेशी बाजारों में चावल की सप्लाई करता है. वहां भारतीय चावल की काफी डिमांड है. देश ने इसे पूरा किया. इसकी वजह से ग्लोबल फूड प्रोवाइडर के तौर भारत की स्थिति मजबूत हुई है.

6-जल संसाधन प्रबंधन : धान की खेत की लिए देश के कई इलाके अनुकूल नहीं हैं. वहां पानी की किल्लत रहती है. इससे फसलों की समय पर सिंचाई न हो पाने समेत कई समस्याएं रहती हैं. ऐसी चुनौतियों के बावजूद भारत ने आधुनिक खेती के जरिए ऐसी जगहों पर भी चावल के प्रोडक्शन को बनाए रखा. वहीं चीन को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

7-पैदावार में लगातार सुधार : साल 2020 से भारत लगातार चावल के उत्पादन में सुधार करता रहा. जबकि चीन बढ़त को बरकरार नहीं रख पाया. भारत ने खेती के मॉडर्न तरीकों और मशीनीकरण को अपनाकर चीन के साथ पैदावार के अंतर को न सिर्फ कम किया बल्कि उससे आगे भी निकल गया.

2025 में भारत में कितने चावल का होगा उत्पादन : साल 2025 में अनुमान है कि भारत 15 करोड़ 20 लाख टन चावल का उत्पादन करेगा जबकि चीन 14 करोड़ 6 लाख का. इससे विश्व में चावल उत्पादन में भारत की भागीदारी 28% से ज्यादा हो जाएगी. वहीं साल 2024 के चावल उत्पादन पर आधारित आंकड़ों के अनुसार भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है.



भारत ने 15 करोड़ टन जबकि चीन ने 14 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया. भारत ने चीन से करीब एक करोड़ ज्यादा टन चावल का उत्पादन किया. इसी से साथ इंडिया विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक बन गया. USDA ने भी इसे बड़ी उपलब्धि मानी है.

एक समय केवल 2 करोड़ टन ही था उत्पादन : आजादी के बाद के सालों में भारत में चावल का उत्पादन केवल 2 करोड़ टन ही था. इसके बाद इसमें लगातर बढ़ोतरी होती रही. ताइवान की बौनी किस्म ताइचुंग नेटिव-1 और IRRI के 'मिरेकल राइस' IR-8 ने हरित क्रांति की शुरुआत की. इससे भारत में चावल की पहली घरेलू बौनी किस्म जया आई. इससे पैदावार में बढ़ोतरी हुई.

172 देशों को चावल भेजता है भारत : मौजूदा समय में भारत करीब 172 देशों को चावल भेजता है. चावल एक्सपोर्ट से देश को साल 2024-25 में 105,720 करोड़ रुपये की कमाई होगी. इसमें बासमती चावल से ही 50,000 करोड़ रुपये आएंगे. हालांकि भारत प्रति हेक्टेयर चावल के उत्पादन में अभी भी चीन से पीछे हैं.

भारत में साल 2025-26 में चावल का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 4,390 किलोग्राम रहने का अनुमान है. यह अभी चीन के प्रति हेक्टेयर 7100 किलोग्राम से पीछे है. मतलब भारत में अभी चीन के मुकाबले 2710 किलो चावल का उत्पादन प्रति हेक्टेयर कम होता है. ऐसे में भारत को आगामी वर्षों में और भी सुधार की जरूरत पड़ेगी. इसमें जल प्रबंधन भी काफी अहम है.

साल 2020 से 2024 तक भारत-चीन में कितना चावल उत्पादन? : भारत और चीन में साल 2020 से 2024 तक के चावल उत्पादन के आंकड़े ग्लोबल रैंकिंग में बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हैं. चीन ने इस दौरान लगभग 14,50 लाख टन से 1490 लाख के उत्पादन के साथ अपन दबदबा बनाए रखा. वहीं भारत ने लगातार ग्रोथ दिखाई. साल 2020 में 1240 लाख टन से बढ़कर साल 2024 में यह 1500 लाख हो गया.

चीन-भारत के अलावा अन्य किन देशों में होता है चावल का उत्पादन? : दुनिया में चीन और भारत के अलावा अन्य कई देश भी धान की खेती करते हैं. बांग्लादेश, इंडोनेशिया, वियतनाम, थाईलैंड, फिलीपींस, बर्मा, पाकिस्तान और ब्राजील में भी चावल का उत्पादन होता है.

चीन में चावल की कौन सी किस्में उगाई जाती हैं? : चीन में इंडिका (ह्सियन) और जैपोनिका (केंग) दोनों किस्म के चावल का उत्पादन होता है. चीन ने 1976 में कमर्शियल खेती के लिए हाइब्रिड चावल विकसित की थी. उस दौरान वह ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बना था. चीन की जितनी जमीन पर धान उगाया जाता है उसके आधे हिस्से में हाइब्रिड धान की खेती की जाती है.

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